
government accommodation (फोटो सोर्स: X हैंडल)
MP News: तबादले और सेवानिवृत्त के बाद भी सरकारी आवास का मोह नहीं छोड़ने वाले अफसर-कर्मचारियों को एक तय अवधि के बाद अब 3 की जगह 90 हजार रुपए प्रतिमाह किराया चुकाना होगा। यही नहीं, किराया हर महीने बढ़ता भी जाएगा और यदि ट्रांसफर व सेवानिवृत्त के छठवें महीने भी मकान खाली नहीं किया तो 1.33 लाख रुपए तक किराया चुकाना पड़ सकता है।
बी-श्रेणी के आवासों पर अवैध कब्जे को लेकर चार महीने पहले कैबिनेट की बैठक में निर्णय के बाद गृह विभाग ने 30 जनवरी को इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। इसके बाद सरकारी आवासों में मामूली किराये पर मजे काटने वालों की सामत आनी तय है।
यदि कोई कर्मचारी/अधिकारी सेवा से त्यागपत्र दे देता है तो वह तीन माह तक ही सामान्य किराए पर मकान में रह सकेगा। तीन माह बाद जुर्माना राशि वसूली जाएगी ओर बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
बी-श्रेणी आवास: यह 67 हजार या उससे अधिक वेतनमान वालों को आवंटित होता है। इसका हर महीने किराया 3 हजार, ख्याति प्राप्त के लिए 6 और सामाजिक- राजनीतिक व कर्मचारी संगठनों के लिए 12 हजार होता है। अब अवैध कब्जे पर 30 और अनाधिकृत रहने पर 90 हजार रुपए किराया।
आइ-श्रेणी आवास: यह चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को आवंटित होते हैं, मासिक किराया 100 रुपए है। गणमान्य नागरिकों के लिए 200, सामाजिक-राजनीतिक व कर्मचारी संगठनों के लिए 400 रुपए है। अनाधिकृत रुप से रहने पर पहले एक हजार तो अब 3 हजार रुपए तक महीने देने होंगे।
गृह विभाग के अनुसार इन संशोधित नियमों का उद्देश्य शासकीय आवासों का दुरुपयोग रोकना और वास्तविक जरूरतमंद अधिकारियों -कर्मचारियों को समय पर आवास उपलब्ध कराना है. मियाद गुजरने के बाद अब किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
Updated on:
04 Feb 2026 10:44 am
Published on:
04 Feb 2026 10:43 am
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