
Outsourced female employee (Photo Source - Patrika)
MP News: डिजिटल इंडिया के दौर में निगम के गलियारों में भ्रष्टाचार का भी 'डिजिटल मॉडल' सामने आया है। आईडी सुधारने जैसे मामूली काम के लिए मजबूर महिला को परेशान किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने या पकड़े जाने के डर से ऑनलाइन भुगतान लिया गया।
जानकारी के मुताबिक समग्र आइडी बनवाने आई युवती से नगर निगम मुख्यालय में पदस्थ महिला कर्मचारी ने 400 रुपए रिश्वत मांगी। कर्मचारी ने 300 रुपए ऑनलाइन लिए। 100 रुपए लेने के लिए मुख्यालय के गेट पर बुलाया। यह रुपए लेते एमआइसी सदस्य मनीष शर्मा ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। निगम अफसरों ने कर्मचारी को हटाने का दावा किया है। शर्मा ने बताया कि प्रकाश नगर निवासी युवती आकांक्षा ने समग्र आइडी के लिए निगम मुख्यालय में आवेदन किया था।
यहां महिला कर्मचारी पिंकी ने आवेदन एप्लाई और अप्रूव करने के लिए 400 रुपए रिश्वत मांगी। यह काम नि:शुल्क होता है। युवती ने मेरे दफ्तर में शिकायत की थी। उसने बताया कि महिला कर्मचारी ने 300 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। अप्रूवल करने के समय 100 रुपए और मांग रही है। इसके बाद मैं युवती के साथ निगम मुख्यालय पहुंचा और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करवाई।
कर्मचारी ने मुख्यालय के गेट पर पैसे लिए। युवती के पास 100 रुपए खुल्ले नहीं थे तो उसने 200 रुपए ही रख लिए। मौके पर विभागीय उपायु त सहित अफसर पहुंचे और छानबीन की। युवती से लिखित शिकायत ली है। जिस महिला कर्मचारी ने रिश्वत ली है वह (शहरी गरीबी उपशमन विभाग) नगर निगम में बतौर आउटसोर्स कर्मचारी है।
इस पूरे मामले का वीडियो वायरल होने के बाद अब चर्चा है कि क्या केवल निलंबन की कागजी कार्रवाई होगी या भ्रष्ट कर्मचारियों पर ठोस कानूनी एक्शन लिया जाएगा? इस मामले में लोगों का कहना है कि यदि निगम के भीतर बैठे इन 'रिश्वतखोरों' पर लगाम नहीं कसी गई, तो स्वच्छता की रैंकिंग सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।
Published on:
01 Feb 2026 10:43 am
