
Ashok Gehlot: फाइल फोटो पत्रिका
जयपुर: राजस्थान की मरुस्थलीय पहचान और पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक माने जाने वाले खेजड़ी वृक्ष को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब केवल स्थानीय विरोध नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेशव्यापी राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे का रूप ले चुका है।
बीकानेर से उठी खेजड़ी बचाओ की आवाज को अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास जैसे दिग्गज नेताओं का खुला समर्थन मिल गया है, जिससे भजनलाल शर्मा सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट के जरिए खेजड़ी बचाओ आंदोलन का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर खेजड़ी जैसे जीवनदायी वृक्षों की बड़े पैमाने पर कटाई न केवल पर्यावरणीय संकट को जन्म दे रही है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत पर भी आघात है।
गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिश्नोई समाज की आस्था से जुड़े इस वृक्ष की रक्षा करना केवल किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों से तुरंत संवाद शुरू करने और ट्री प्रोटेक्शन एक्ट पर सकारात्मक फैसला लेने का आग्रह किया। उनका कहना था कि ऐसा कोई विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डाल दे।
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी आंदोलन के समर्थन में सामने आ चुकी हैं। उन्होंने खेजड़ी को साधारण पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की आस्था और परंपरा से जुड़ा देववृक्ष बताया। राजे ने कहा कि जिस वृक्ष की पूजा की जाती है, उसका संरक्षण हमारा नैतिक कर्तव्य है।
उन्होंने ओरण और गौचर भूमि के संरक्षण को भी खेजड़ी से जोड़ते हुए राजनीति से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास करने की अपील की। राजे का यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि खेजड़ी का मुद्दा अब सत्ता और विपक्ष की सीमाओं से बाहर निकल चुका है।
बीकानेर में कलेक्ट्रेट के सामने चल रहा महापड़ाव तीसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग धरना स्थल पर जुटे। आंदोलन के दौरान विरोध के प्रतीकात्मक तरीके भी देखने को मिले। पंजाब, श्रीगंगानगर और रावला मंडी से आए युवाओं ने अपने हाथ बांधकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, जिससे प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
धरना स्थल पर साधु-संतों के नेतृत्व में हवन का आयोजन किया गया, जिसके बाद जिला कलेक्टर कार्यालय तक मौन जुलूस निकाला गया। आमरण अनशन पर बैठे सैकड़ों लोग खेजड़ी की कटाई रोकने और कठोर कानून बनाने की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खेजड़ी मरुस्थल की जीवनरेखा है और इसके बिना राजस्थान की पारिस्थितिकी असंतुलित हो जाएगी।
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने खेजड़ी मुद्दे पर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले से मौजूद सख्त कानूनों को कमजोर कर दिया है, जिससे खेजड़ी जैसे उपयोगी वृक्ष खतरे में आ गए हैं। उनका कहना था कि खेजड़ी केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन और जीवन चक्र का आधार है।
खाचरियावास ने खेजड़ी की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इसके पत्ते पशुओं का आहार हैं, इसकी लूम से बकरियों का पालन होता है और सूखी टहनियां ईंधन के काम आती हैं, जबकि पेड़ दोबारा पनप जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान नहीं किया, तो कांग्रेस इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाएगी।
Updated on:
04 Feb 2026 06:17 pm
Published on:
04 Feb 2026 05:50 pm
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