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विश्व कैंसर दिवस: 2035 तक लगभग हर घर में होगा कैंसर का मरीज!, डॉक्टरों ने दी चेतावनी, यह है बड़े कारण

आज पूरी दुनिया में विश्व कैंसर दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन कैंसर की जो तस्वीर सामने आ रही है, वह डराने वाली है।

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आज पूरी दुनिया में विश्व कैंसर दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन कैंसर की जो तस्वीर सामने आ रही है, वह डराने वाली है। जयपुर के वरिष्ठ चिकित्सकों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा जीवनशैली, खान-पान और पर्यावरणीय हालात नहीं बदले तो वर्ष 2035 तक लगभग हर घर में एक कैंसर मरीज होगा। यह चेतावनी डर फैलाने के लिए नहीं, बल्कि समय रहते जागरूक होने का आखिरी अलार्म है।

चिकित्सकों के अनुसार कैंसर बेहद तेज़ी से फैल रहा है। 2025 के डाटा पर नजर डालें तो स्थिति पहले ही चिंताजनक है। आंकड़े बताते हैं कि हर तीन घरों में से एक घर में औसतन कैंसर का मरीज मौजूद है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही रफ्तार रही तो अगले 10 वर्षों में हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे।

जयपुर बना सबसे प्रभावित शहर

मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दिवेश गोयल के अनुसार इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज की रिपोर्ट बताती है कि प्रति एक लाख आबादी पर कैंसर मरीजों के मामले में जयपुर राजस्थान का सबसे ज्यादा प्रभावित शहर है। यहां होंठ, मुंह, गला, ग्रसनी और पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं।

जहर बनता खाना और पानी

डॉ. गोयल का कहना है कि आज फल और सब्जियों में बेतहाशा पेस्टिसाइड का इस्तेमाल हो रहा है। पीने का पानी भी पूरी तरह शुद्ध नहीं है। इसका सीधा असर शरीर पर पड़ रहा है। पहले कैंसर बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब युवा और मध्यम आयु वर्ग तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है।

पेट और मुंह के कैंसर में विस्फोट

चिकित्सकों के अनुसार प्रिजर्वेटिव युक्त खाद्य पदार्थों के बढ़ते उपयोग के बाद पेट से जुड़े कैंसर के मामलों में खतरनाक बढ़ोतरी हुई है। राजस्थान में मुंह, स्तन, सर्वाइकल, फेफड़े, मस्तिष्क और प्रोस्टेट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। तंबाकू और गुटखा पुरुषों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं, जबकि महिलाओं में स्तन और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर चिंता का कारण बन चुके हैं।

एक-तिहाई हेड एंड नेक कैंसर

हेड एवं नेक सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार शर्मा बताते हैं कि दुनिया भर में हेड एंड नेक कैंसर के कुल मामलों में से लगभग एक-तिहाई मामले भारत में पाए जाते हैं। राजस्थान में यह सभी कैंसर मामलों का 32% से अधिक है। मुंह में छाले, निगलने में परेशानी और आवाज में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।

इलाज संभव, पर जागरूकता जरूरी

सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नरेश कुमार सोनी के अनुसार भारत में 60–70% कैंसर मामलों में सर्जरी जरूरी होती है। अच्छी खबर यह है कि करीब 40% कैंसर समय रहते रोके जा सकते हैं, अगर लोग तंबाकू छोड़े, संतुलित आहार लें, व्यायाम करें और नियमित जांच कराएं।

एआई और नई थेरेपी से उम्मीद

भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सीएआर—टी सेल थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकें कैंसर इलाज में नई उम्मीद बन रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक मजबूत हो रही है, लेकिन लड़ाई तभी जीती जा सकती है जब आम आदमी समय रहते चेते।

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