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हेडशॉट के शौकीन को हेड पर ही मारी गोली, डर इतना था कि लोग नाम नहीं लेते…वो कहकर खत्म करते थे बात

हेडशॉट के शौकीन को हेड पर ही मारी गोली। जानिए आज की क्राइम सीरीज में ‘हसीन टैक्स’ लेने वाले हसीन मोटा एनकाउंटर में कैसे हुआ ढेर।

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मेरठ

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Aman Pandey

Jan 22, 2026

Haseen mota

हसीना मोटा की ये तस्वीर औरिजनल फोटो की AI कॉपी है।

30 दिसंबर, 2017; रात 10:50 बजे। मेरठ के पल्लवपुरम फेज-2 की सड़क पर सन्नाटा पसरा था। अचानक, एक मोटरसाइकिल अंधेरे को चीरते हुए निकली। पुलिस ने नाकाबंदी कर रखी थी। रुकने का इशारा किया तो मोटरसाइकिल के पीछे बैठा 115 किलोग्राम का भारी-भरकम आदमी पुलिस पर गोलियां चलाने लगा। इस पर पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका गूंज उठा। अपराधी अपनी बाइक छोड़कर खेतों की तरफ भागने लगा तभी तीन गोलियां उसे लगी और वह मौके पर ढेर हो गया। पुलिस पास पहुंची तो उसकी पहचान हसीन मोटा के रूप में हुई।

छोटी चोरी से शुरू होकर हत्या तक पहुंचा अपराध का सफर

मेरठ के लिसाड़ी गेट इलाके में रहने वाले हसीन ने अपराध की शुरुआत मोटरसाइकिल की चेन तोड़ने जैसी छोटी चोरी से की थी। कुछ ही समय बाद उसका उठना-बैठना मेरठ के बड़े अपराधियों के बीच होने लगा। उसने धमकी देकर रंगदारी वसूलना शुरू कर दिया। पहली बड़ी वारदात 2009 में दर्ज हुई, जब पैसे न मिलने पर उसने एक कारोबारी की हत्या कर दी।

धीरे-धीरे इलाके में उसका खौफ फैलने लगा। कारोबारियों से मोटी रंगदारी वसूलने की वजह से साथियों ने उसे ‘हसीन मोटा’ कहना शुरू कर दिया। इसके पीछे एक वजह उसका 115 किलो का वजन भी था।

चार राज्यों में ‘हसीन टैक्स’ की दहशत

मेरठ और मुजफ्फरनगर के बाद हसीन का नेटवर्क चार राज्यों तक फैल गया। यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा के कारोबारी उसके निशाने पर थे। फोन पर कॉल जाता, जान के बदले पैसे की मांग होती, और इनकार पर सीधा सिर में गोली मार देता। सिर्फ मेरठ में उसके खिलाफ 11 केस दर्ज थे, जबकि बाकी तीन राज्यों में 30 से अधिक मुकदमे। हसीन कारोबारियों से ‘हसीन टैक्स’ वसूल करता था। उसने चेतावनी दी थी कि टैक्स न देने पर गोली सीधा सिर पर लगेगी।

आठ साल में ऐसा खौफ कि कोई गवाही देने को तैयार नहीं

8 साल के भीतर हसीन इतना बड़ा नाम बन चुका था कि लोग उसके खिलाफ मुंह खोलने से डरते थे। रोजाना लूट और धमकी की घटनाएं होती थीं, लेकिन पुलिस को मुखबिर तक नहीं मिलते थे। जिसने भी शिकायत या मुखबिरी की कोशिश की, उसकी हत्या कर दी गई। सड़क पर खड़े होकर वह शर्ट उठाकर तमंचा दिखाना उसकी पहचान बन चुका था, जिससे आतंक बना रहे।

आखिरकार सगा भाई चला पुलिस के पास

लंबे वक्त बाद पुलिस के पास पहली ठोस शिकायत पहुंची और वह भी उसके सगे भाई मीट कारोबारी वकील अहमद की तरफ से। हसीन ने ढाई लाख की रंगदारी मांगी थी। पैसे मना करने पर हसीन ने धमकी दी कि “अभी लेकर दिखाएंगे।” भाई ने 100 नंबर कॉल कर पुलिस बुला ली। इस घटना के बाद गुस्साए हसीन ने किसी कारोबारी की हत्या की धमकी दे दी, जिससे पुलिस और सरकार दोनों सतर्क हो गईं।

सरकार का दबाव और डीजीपी का आदेश

लगातार चल रही लूट, अपहरण और हत्या की वारदातों से व्यापारियों का धैर्य टूट चुका था। योगी सरकार बनी तो व्यापारी खुले तौर पर गुहार लगाने लगे। डीजीपी ऑफिस से आदेश निकला- हसीन की क्राइम कुंडली खोलो और हर हाल में जिंदा या मुर्दा गिरफ्तार करो। उसके सिर पर 50 हजार का इनाम घोषित हुआ। अफसरों की टीम बाजारों में घूमकर कारोबारी वर्ग से मिलना शुरू हुई।

30 दिसंबर 2017 की रात वो रात...

क्राइम ब्रांच, एसटीएफ और लोकल पुलिस ने सीक्रेट ऑपरेशन शुरू किया। चार महीने की ट्रैकिंग के बाद एक कारोबारी ने जानकारी दी कि हसीन टैक्स लेने आ रहा है। इलाके को घेर लिया गया। शनिवार रात 10:50 बजे पुलिस को हसीन मोटरसाइकिल पर दिख गया। पीछा होते ही उसने फायरिंग शुरू कर दी। बाइक खेतों की तरफ ले जाई गई। जवाबी फायर में पुलिस ने गोलियां चलाईं। तीन गोलियां हसीन को लगीं, एक सिर में भी। कुछ ही देर में ‘हसीन मोटा’ का आतंक खत्म हो चुका था।