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अधूरे पड़े आंगनबाड़ी केंद्रों का समय पर नहीं हो रहा कार्य,जिले भर में एक सैंकड़ा से अधिक स्थानों पर चल रहा है कार्य

Anganwadi centres running in the district नरसिंहपुर. जिले में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए अपने भवन का सपना महिनों-वर्षो बाद भी पूरा नहीं हो पा रहा है। कहीं किराए के भवनों में केंद्र चल रहे हैं तो कहीं पंचायत या अन्य किसी सरकारी भवन में केंद्रों का संचालन हो रहा है। जिले में एक […]

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जिले में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए अपने भवन का सपना महिनों-वर्षो बाद भी पूरा नहीं हो पा रहा है। कहीं किराए के भवनों में केंद्र चल रहे हैं तो कहीं पंचायत या अन्य किसी सरकारी भवन में केंद्रों का संचालन हो रहा है।

जिले में जगह-जगह भवनों का कार्य चल रहा है।

Anganwadi centres running in the district नरसिंहपुर. जिले में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए अपने भवन का सपना महिनों-वर्षो बाद भी पूरा नहीं हो पा रहा है। कहीं किराए के भवनों में केंद्र चल रहे हैं तो कहीं पंचायत या अन्य किसी सरकारी भवन में केंद्रों का संचालन हो रहा है। जिले में एक सैंकड़ा से अधिक केंद्र भवनों का कार्य आधा-अधूरा है। जिससे केंद्रों के सुचारू संचालन के साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग के जरिए संचालित होने वाली योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।
जिले के 6 विकासखंडो में करीब 1200 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। हर केंद्र का अपना भवन हो इस मंशा से शासन ने करीब 771 भवनों का कार्य अलग-अलग समय में स्वीकृत किया था। लेकिन इनका निर्माण लगातार पिछड़ता जा रहा है। वहीं कई जगह तो कार्य शुरू होने में ही कठिनाई आ रही है। विभाग के आंकड़े कहते हैं कि जिले में करीब 421 केंद्र भवनविहीन संचालित हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां भवन किराए के भवनों में संचालित हैं उनके लिए किराया की दर भी अलग-अलग है। बताया जाता है कि जिले के शहरी क्षेत्रों में चल रहे 12 से 15 भवनों के किराए में वृद्धि करने भी विभाग ने उच्च स्तर से प्रक्रिया कराई है। जिससे केंद्रों का संचालन सुचारू रूप से होता रहे। प्रभारी अधिकारी महिला बाल विकास विभाग राधेश्याम वर्मा कहते हैं कि जिन भवनों का कार्य चल रहा है उसे पूरा कराने निरतंर प्रयास किया जा रहा है। चूंकि कार्य जिला पंचायत के माध्यम से होता है इसलिए जिला पंचायत के जरिए भी कार्यो को समय-सीमा में कराने निर्देशित किया जाता है।
भवनों की कमी से यह समस्या
केंद्रों का संचालन करने के लिए अपना भवन न होने से कर्मचारियों को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। बच्चों और गर्भवती व धात्री महिलाओं को दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। विभाग के जरिए होने वाली गतिविधियों, बच्चों को खेलने, बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहंी रहती।
फैक्ट फाइल
कुल संचालित केंद- 1200
विभागीय भवन- 534
अन्य शासकीय भवन- 443
किराए से संचालित-223
कुल स्वीकृत भवन- 771
पूर्ण भवन- 571
निर्माणाधीन भवन- 112
निर्माण अप्रारंभ- 88
जर्जर भवन- 38
मरम्मत योग्य भवन- 65
भवनविहीन केंद्र-421