
Ajit Pawar's plane crash
महाराष्ट्र (Maharashtra) के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार (Ajit Pawar) की बुधवार, 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती में विमान हादसे में मौत हो गई। लैंडिंग के दौरान विमान क्रैश हो गया जिसमें अजित पवार समेत 5 लोग मारे गए। अजित पवार का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उनके विमान का ब्लैक बॉक्स भी बरामद हो चुका है।
महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को यह मामला सीआईडी (CID) को सौंप दिया। बारामती तालुका पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज करने के बाद इस रिपोर्ट को सीआईडी को सौंप दिया है। सीआईडी ने आज से इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है कि अजित पवार का विमान कम विज़िबिलिटी की वजह से हुआ, जिसकी वजह से पायलट को लैंडिंग में परेशानी हुई। यह भी बताया जा रहा है कि बारामती में हुए इस विमान हादसे में रीडबैक में भी परेशानी आई। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के बयान के अनुसार विमान को लैंडिंग की अनुमति 8:43 बजे मिली, लेकिन पायलट ने लैंडिंग क्लियरेंस का रीडबैक नहीं दिया, जिसका कारण संचार समस्या हो सकता है। हालांकि अभी तक विमान हादसे के कारण की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है, लेकिन ब्लैक बॉक्स की जांच से सीआईडी को इसमें मदद मिलेगी।
अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में किया गया। बेटे पार्थ और जय ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। अपने नेता के आखिरी दर्शन करने के लिए समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने नम आंखों से अजित पवार को अंतिम विदाई दी। जहाँ एक तरफ बारामती में लाखों की भीड़ ने नम आंखों से अपने 'दादा' को अंतिम विदाई दी, वहीं दूसरी तरफ नासिक से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अजित पवार के निधन का सदमा बर्दाश्त न कर पाने के कारण उनके एक कट्टर समर्थक की हार्ट अटैक से मौत हो गई।
बारामती में हुए दर्दनाक विमान हादसे ने न केवल महाराष्ट्र की राजनीति को जख्म दिया है, बल्कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर की एक होनहार बेटी को भी छीन लिया। अजित पवार के विमान को उड़ा रही युवा पायलट शांभवी पाठक का इस हादसे में निधन हो गया। एयरफोर्स अफसर की बेटी शांभवी ने देश के दिग्गजों को आसमान की सैर कराई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मार्च में उनकी शादी की बातें चल रही थीं। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था और उनकी डोली उठने की जगह अर्थी उठ गई।
Updated on:
30 Jan 2026 03:01 pm
Published on:
30 Jan 2026 02:16 pm
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