13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

icon

वीडियो

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Lok Sabha Elections 2024: मोदी की छांव, फिर भी जदयू की राह में बाधाएं विकट

बिहार की किशनगंज एकमात्र ऐसी सीट है, जिस पर पिछली बार कांग्रेस की जीत हुई और इसी के साथ महागठबंधन का खाता खुल पाया था। पूर्वांचल के भागलपुर और बांका में भी जदयू को अपनी सीट बचाने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इन सभी पांच सीटों पर दूसरे चरण में 26 अप्रेल को वोट डाले जाएंगे। पढ़िए प्रियरंजन भारती की विशेष रिपोर्ट...

2 min read
Google source verification
PM Narendra Modi Nitish Kumar

बिहार के सीमांचल और पूर्वांचल में जदयू को कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सीमांचल की मुस्लिम-यादव बहुल आबादी वाले किशनगंज, कटिहार और पूर्णियां में लालू यादव की रणनीति से बदले समीकरणों ने जदयू की परेशानियां बढ़ा दी हैं। इनमें से किशनगंज एकमात्र ऐसी सीट है, जिस पर पिछली बार कांग्रेस की जीत हुई और इसी के साथ महागठबंधन का खाता खुल पाया था। पूर्वांचल के भागलपुर और बांका में भी जदयू को अपनी सीट बचाने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इन सभी पांच सीटों पर दूसरे चरण में 26 अप्रेल को वोट डाले जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव की छांव में खड़े जदयू की राहें इन क्षेत्रों में आसान नजर नहीं आ रही है।

सीट शेयरिंग को लेकर आरजेडी कांग्रेस के बीच बढ़ी खटास दूर कर राहुल गांधी इस चुनाव में पहली बार भागलपुर में चुनावी रैली को पहुंचे तो तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी ने भी मंच साझा कर एनडीए के खिलाफ हुंकार भरी। भागलपुर सीट से कांग्रेस विधायक अजित शर्मा 'इंडिया' चैप्टर के उम्मीदवार हैं तो जदयू ने अपने सांसद अजय मंडल को ही रणक्षेत्र में उतारा है।

जदयू की राह मुश्किल

जहां तक बांका संसदीय क्षेत्र की बात है तो यहां भी जदयू को चुनौती झेलनी पड़ रही है। जदयू ने यादव, राजपूत और अन्य पिछड़ी जाति बहुल सीट पर सांसद गिरिधारी लाल यादव को फिर मैदान में उतारा है। इनका मुकाबला फिर 2019 के लोकसभा चुनाव की ही तरह आरजेडी के जयप्रकाश नारायण यादव से है। आमने-सामने की लड़ाई रोचक हो सकती है। जदयू मोदी मैजिक के भरोसे फिर बेड़ा पार करने की जुगत में हैं। कांग्रेस नेतृत्व ने जोर लगाकर कटिहार सीट समझौते में अपने हिस्से ले तो ली पर अब तारिक अनवर की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हैं।

जदयू के सांसद दुलालचंद गोस्वामी हिंदू वोटों और मोदी मैजिक के सहारे फिर चुनावी जंग में फतह पाने को बेताब हैं। मुस्लिम और यादव वोटों के सहारे तारिक अनवर जीतने की जद्दोजहद कर रहे हैं। राहुल गांधी की भागलपुर रैली से मुस्लिम समाज को कनेक्ट करने का मौका मिला है। सीमावर्ती बांग्लादेश से घुसपैठ के लिए चर्चित कटिहार में इस बार भी आर-पार की लड़ाई छिड़ी है। देखना यही खास होगा कि जीत हार में इस बार क्या मायने रखता है।

किशनगंज क्षेत्र में 70 फीसदी मुस्लिम आबादी है। एनडीए की सहयोगी जदयू ने मुजाहिद आलम को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस से सांसद मोहम्मद जावेद और एआइएमआइएम के विधायक अख्तरूल ईमान के चुनावी मैदान में उतरने से संघर्ष त्रिकोणीय हो गया है। 2019 में एक यही सीट महागठबंधन के खाते में गई जिसे कांग्रेस के इसरारूल हक ने जीता था। उनके असमय निधन के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस के मो.जावेद ने जंग जीती। यहां सांप्रदायिक आधार पर हमेशा ही वोटों की गोलबंदी होती रही है।

#में अब तक