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Missing girls in India : चंद्रमुनि की बेटी अकेली नहीं: देश में हर साल 90 हजार बेटियां होती हैं लापता, MP बना हॉटस्पॉट

Missing girls India : झारखंड की चंद्रमुनि उरांव की तरह हजारों माताओं की आंखें अपनी लापता बेटी के लिए रोते—रोते सूख जाती हैं लेकिन वर्षों बाद तक गुमशुदा हो चुकी नन्हीं परियों की कोई खबर नहीं मिलती। वे थाना का चक्कर काटती हैं। कोर्ट में मुकदमा करती हैं। हर रोज वह उम्मीद का एक दीया मन में जलाती हैं और अपनी बेटियों की राह ताकने में अपनी आंखों को ड्यूटी पर लगा देती हैं। खौपनाक बात है कि लापता लोगों में अधिकतर लड़कियां ही होती हैं। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट...

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Missing girls in India as over 90,000 girls go missing every year, women safety crisis

Missing Girls in India

Missing girls in India : चंद्रमुनि उरांव की बेटी सात साल से लापता है। उन्हें नहीं पता कि उनकी बेटी कहां है, किस हाल में है? बेटी के गुमशुदा होने का पहाड़ सा दुख लिए वह यहां से वहां भटकती रहती हैं। उन्होंने अपनी बेटी की खोज जारी रखी है क्योंकि उसे लगता है कि वह दुनिया के किसी न किसी कोने में जिंदा है। देश में अकेली चंद्रमुनि नहीं है जिसको अपनी लापता हुई बेटी का वर्षों से इंतजार है। हर साल हजारों बेटियां यूं ही अपने मां-बाप और परिवार से जुदा होकर किसी अंधेरी गुफा में खो जाती है। आइए पढ़ते हैं विस्तृत रिपोर्ट।

24 वर्ष पहले पति की दुघर्टना में मौत

चंद्रमुनि उरांव की शादी 20 वर्ष में ही हो गई थी। लगभग 24 वर्ष पहले पति की एक दुघर्टना में दर्दनाक मौत के बाद से वह काफी समय तक सदमे में चली गई। लेकिन जीवन एक नदी की तरह बहती और बढ़ती जाती है। सो, चंद्रमुनि भी अपने घर और परिवार की जिम्मेदारी को आगे बढ़ाती रही। वह अपने दोनों संतानों के सहारे अपना जीवन आगे बढ़ाना शुरू किया लेकिन जीवन में फिर से एक बार पहाड़ टूट गया।

सात साल पहले बेटी हो गई लापता, लगा दुनिया ही खत्म हो गई

चंद्रमुनि की 15 वर्षीय बेटी 2018 में लापता हो गई थी। अब वह सारा दिन यही रट लगाते रहती हैं, 'मेरा सब कुछ खो गया। मेरी दुनिया खत्म हो गई।' वह कहती हैं कि भक्तिन ने मेरी बेटी को गायब कर दिया। वह बताती हैं कि उनकी बेटी एक साल भक्तिन के पास जाती थी और उसके प्रभाव में थी। पति की मौत और बेटी के गायब होने के बाद चंद्रमुनि का सहारा अब बेटा ही रह गया है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से लेकर 2021 तक 18 वर्ष से कम उम्र की 2.5 लाख लड़कियां लापता हो गईं।

पति की हिमाचल में गड्डा खोदते समय हो गई थी मौत

चंद्रमुनि के पति चंद्र कुजूर की हिमाचल प्रदेश में गड्ढा खोदते समय उसमें गिरने से मौत हो गई थी। पति हिमाचल में ठेका मजदूर के रूप में काम करते थे। कुजूर की मौत के बाद मुआवजे के रूप में 50,000 रुपये मिले थे। पति का हिमाचल में अंतिम संस्कार करने के बाद वह गुमला स्थित अपने गांव लौट आई थीं।

बेटी की गुमशुदगी की पुलिस ने दो साल तक नहीं लिखी एफआईआर

चंद्रमुनि ने अपनी बेटी की गुमशुदगी की बार-बार एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें लौटा दिया गया। दो वर्ष तक धक्का खाने के बाद गुमला पुलिस स्टेशन में 6 फरवरी 2020 को एफआईआर दर्ज कर ली गई। एफआईआर में उन्होंने यह शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 15 वर्षीय बेटी को अगस्त 2018 में 'धार्मिक कार्यों में सहायता करने के बहाने अगवा कर लिया गया और बाद में बेच दिया गया।' पिछले साल चंद्रमुनि ने एक सामाजिक कार्यकर्ता के कहने पर अपनी बेटी के लापता होने के बारे में झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर करवाई है।

पुलिस के साथ राज्य सरकार को हाईकोर्ट ने दिए ये आदेश

झारखंड हाई कोर्ट ने जांच में "अस्वीकार्य" देरी के लिए पुलिस को फटकार लगाते हुए पुलिस को दो सप्ताह के भीतर जांच की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने झारखंड सरकार से चंद्रमुनि के मामले को संदर्भ बिंदु मानते हुए प्रवासी श्रमिकों के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार करने को भी कहा। गृह सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वर्चुअल माध्यम से पेश हुए। अदालत ने नीतिगत रूपरेखा प्रस्तुत करने के लिए दो महीने का समय मांगने की याचिका खारिज कर दी और सरकार को 30 दिनों के भीतर ऐसा करने को कहा।

देश में हर साल करीब 90 हजार लड़कियां होती हैं लापता

आंकड़ों से पता चलता है कि प्रतिवर्ष हजारों महिलाएं और बच्चे लापता हो जाते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्टों से पता चलता है कि अकेले 2021 में ही देशभर में 90,000 से ज्यादा लड़कियां लापता हुई थीं। वर्ष 2024 की शुरुआत की रिपोर्टों से पता चला कि आंध्र प्रदेश में 3,000 से अधिक लड़कियां लापता हो गईं।

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा लापता होती हैं लड़कियां

2021 और 2024 के मध्य के बीच मध्य प्रदेश में 31,000 से अधिक महिलाएं और लड़कियां लापता हो गईं। यानी औसतन प्रतिदिन लगभग 28 महिलाएं और लड़कियां गायब हुईं। गायब महिलाओं में सबसे ज्यादा लड़कियां आदिवासी समाज से आती हैं। इंदौर और सागर जिलों में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। सागर में 245 और इंदौर में 2,384 से अधिक मामले सामने आए हैं। वर्ष 2025 में भारत में लापता लड़कियों को लेकर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई।

ऑपरेशन मुस्कान की सफलता दर कम

अकेले मध्य प्रदेश में ही डेढ़ साल तक की अवधि में 23,000 से अधिक महिलाओं और लड़कियों के लापता होने की सूचना मिली। राज्य में लापता लोगों को ढूंढने के लिए चलाए गए "ऑपरेशन मुस्कान" की सफलता दर कम होने के कारण इसकी आलोचना हुई।

दिल्ली-मुंबई में भी महिलाएं और लड़कियां ज्यादा

वहीं दिल्ली में 2025 में (2024 के रुझानों को शामिल करते हुए), लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट किए गए मामलों में से 60% से अधिक महिलाएं और लड़कियां थीं। मुंबई में मात्र 36 दिनों में 82 बच्चों के लापता होने की सूचना मिली, जिनमें अधिकतर लड़कियां थीं।

कहां गुम हो जाती हैं लापता बच्चियां?

वर्ष 2019 में 18 वर्ष से कम उम्र की 82,619 लड़कियां लापता हो गई थीं। 2020 में गुमशुदा हुई लड़कियों की संख्या में थोड़ी कमी दर्ज की गई लेकिन इसके बावजूद 79,233 बच्चियां लापता हुईं। वहीं, वर्ष 2021 में 18 वर्ष से कम उम्र की 90,133 लड़कियां गायब हो गईं।

यह भी पढ़ें : Pollution death in India: प्रदूषण से हर साल 17 लाख लोगों की होती है मौत, तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में प्रदूषण सबसे बड़ी बाधा, जानिए कैसे?

2022 में हर रोज 172 से ज्यादा लड़कियां लापता हुईं

लोकसभा में 25 मार्च 2025 में एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025 में मार्च में लोकसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए यह बताया गया कि वर्ष 2022 में पूरे देश गायब हुई 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों में 33,798 लड़कियां ऐसी थीं जिनका कुछ पता नहीं लगाया जा सका। बिहार (5635), पश्चिम बंगाल (5411), ओडिशा (4320), दिल्ली (4205) और मध्य प्रदेश (2917) में ऐसी गायब हुईं लड़कियों की संख्या सर्वाधिक पाई गई। मंत्रालय ने यह जानकारी एनसीआरबी की भारत में अपराध रिपोर्ट के हवाले से मुहैया कराई थी।

  • औसतन प्रतिदिन 172 से अधिक लड़कियां लापता हुईं।
  • लापता हुए 83,350 बच्चों में से 62,946 लड़कियां थीं।
  • लापता हुई 33,798 लड़कियां अभी भी लापता हैं।
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