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UGC Bill 2026 : खून से खत लिख रहे सवर्ण नेता, दलित चिंतकों ने कहा मास्टरस्ट्रोक… यूजीसी के नए कानून पर बवाल क्यों?

UGC Bill 2026 Controversy : यूजीसी के नए बिल 2026 को लेकर खूब हो-हल्ला मचा है। दिल्ली से लेकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार तक में सवर्ण संगठन इसे काला कानून बताकर सड़कों पर उतरे हैं। वहीं, दलित, आदिवासी, ओबीसी समुदाय यूजीसी के नए रेगुलेशन को जातिवादियों के खिलाफ मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं। सोशल मीडिया से […]

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जयपुर

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Ravi Gupta

Jan 27, 2026

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प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Patrika

UGC Bill 2026 Controversy : यूजीसी के नए बिल 2026 को लेकर खूब हो-हल्ला मचा है। दिल्ली से लेकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार तक में सवर्ण संगठन इसे काला कानून बताकर सड़कों पर उतरे हैं। वहीं, दलित, आदिवासी, ओबीसी समुदाय यूजीसी के नए रेगुलेशन को जातिवादियों के खिलाफ मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़क पर इसको लेकर खूब बातें हो रही हैं। सर्वेश पांडेय, सवर्ण आर्मी प्रमुख ने तो बिल के खिलाफ खून से खत लिखकर विरोध किया है। वहीं, श्री राजपूत करणी सेना जोधपुर बंद का ऐलान कर चुकी है। संभावना है कि इस मुद्दे को लेकर करणी सेना भारत बंद की घोषणा भी जल्द कर दे।

13 जनवरी को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन) रेगुलेशंस 2026 जारी किया। इस रेगुलेशन में क्या गलत है, क्या वाकई जिस बात का विरोध हो रहा है वो अधिसूचना में लिखा गया है या यूं ही विरोध जारी है? दलित, आदिवासी, ओबीसी समुदाय इसे मास्टरस्ट्रोक जैसा क्यों मान रहे हैं?

इन सभी सवालों का जवाब पत्रिका के रवि कुमार गुप्ता ने निम्नलिखित लोगों से पूछा है, जिसे आप विस्तार से समझ सकते हैं -

  • प्रो. सुखदेव थोराट (UGC पूर्व अध्यक्ष, अर्थशास्त्री)
  • सुमित चौहान (दलित पत्रकार और एक्टिविस्ट)
  • मान सिंह मेड़तिया (श्री राजपूत करणी सेना, जोधपुर)
  • सर्वेश पांडेय (सवर्ण आर्मी)
  • रजनीकांत नायक (आरएसएस)

यूजीसी न्यू रेगुलेशन 2026 पीडीएफ | UGC Regulations 2026 pdf

यूजीसी न्यू रेगुलेशन 2026 क्या कहता है। इसके बारे में जारी अधिसूचना में साफ तौर पर जिक्र किया गया है। साथ ही ये बताया गया है कि समता समिति और समता हेल्पलाइन यानी समता जैसे शब्दों पर जोर दिया गया है। साथ ही धर्म, जाति, लिंग या किसी भी आधार पर होने वाले भेदभाव को खत्म करने की बात लिखी है। साथ ही इस रेगुलेशन का उद्देश्य भी यही है। आप इस बात को उपरोक्त पीडीएफ में पढ़कर भी समझ सकते हैं।

समता और भेदभावमुक्त कैंपस से सवर्ण क्यों डर रहे- प्रो. थोराट

प्रोफेसर सुखदेव थोराट ने नई अधिसूचना को अपनी भाषा में समझाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनिमय 2026 का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थाओं में समानता को बढ़ाना है। धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान, विकलांगता के आधार पर छात्र-छात्राओं से भेदभाव ना हो इसलिए ये बनाया गया। विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विकलांगों के लिए सही वातावरण देना है।

वो ये भी कहते हैं, इसमें सवर्ण जाति के विरोध में कहां कुछ लिखा है। इस अधिसूचना में सिर्फ समता और भेदभावमुक्त कैंपस की बात कही जा रही है। इसको लेकर सवर्ण नेता क्यों बौखलाए हैं, ये अंदरूनी बात उनको पता होगी।

सवर्ण स्टूडेंट्स को डरा रहा ये बिल - सवर्ण आर्मी प्रमुख

वहीं, खून से खत लिखकर विरोध करने वाले सर्वेश पांडेय कहते हैं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विकलांगों का जिक्र है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव नहीं होता है। इससे ये भी साफ हो रहा है कि भेदभाव करने वाले सिर्फ और सिर्फ सवर्ण ही हैं। जबकि, जेएनयू कैंपस में ब्राह्मण, बनिया खिलाफ खुलकर नारे लगते हैं। ऐसे में सवर्ण जाति का छात्र कैसे सुरक्षित महसूस कर सकता है। वो हमेशा डर के माहौल में कैंपस में रहेगा। अगर देश को जातिमुक्त बनाना है तो कानून भी उसी आधार पर बने ना कि जाति देखकर बनाया जाए।

ये बिल सवर्णों को शोषक बताने वाला

जोधपुर बंद करने की घोषणा करने वाले मान सिंह मेड़तिया कहते हैं, ये बिल सवर्णों को शोषक बताने वाला है। इससे ये समझ में आ रहा है कि सिर्फ हम ही शोषण करने वाले हैं। जबकि, शोषण करने वाला तो कोई भी हो सकता है। अगर सरकार ये काला कानून वापस नहीं लेती है तो हम लोग भारत बंद करके विरोध जताएंगे।

ओडिशा में आरएसएस के साथ जुड़े रजनीकांत नायक का कहना है, ये सरकार जातिमुक्त करना चाहती है या जाति को बढ़ावा दे रही है। यूजीसी का नया कानून पूरी तरह से सामान्य वर्ग के खिलाफ जा रहा है।

हर शोषण करने वाला सवर्ण - दलित चिंतक

इसको लेकर सुमित चौहान कहते हैं, कई बार ओबीसी के लोग भी दलित या उनसे नीच कह जाने वाले जाति के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। उनको भी सजा देने का प्रावधान होना चाहिए। इसके अलावा यूजीसी बिल 2026 में कुछ ऐसा नहीं है जिसको लेकर सवर्ण जाति के लोगों को डरने की जरुरत है। सवर्णों को ये समझना होगा कि हर सवर्ण शोषक नहीं होता, पर हर शोषण करने वाला सवर्ण ही होता है। ये बात कई सरकारी सर्वे, एनसीआरबी के आंकड़े, खबरों आदि के जरिए सामने आती रहती है। असल में हमें ये समझने की आवश्यकता है कि ये रेगुलेशन सवर्णों के खिलाफ नहीं बल्कि, जातिवादियों के विरोध में है। अगर आप जातिवादी हैं तो डरिए और नहीं हैं तो फिर किस बात का डर और बौखलाहट।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

मंगलवार (27 जनवरी) को अधिवक्ता विनीत जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशन 2026 के नियम 3(सी) पर रोक लगाने की मांग की गई है। अधिवक्ता विनीत जिंदल की याचिका में बताया गया है कि यह प्रावधान जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक सीमित करता है।