
CG News: क्रेशर प्लांट से उड़ने वाली धूल आज ग्रामीण और रिहायशी इलाकों के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। पत्थरों की क्रशिंग के दौरान निकलने वाली महीन धूल हवा के साथ घरों, खेतों और सड़कों तक फैल जाती है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। सांस की बीमारियों से लेकर फसलों के नुकसान तक, क्रेशर प्लांट की धूल स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है। खैरागढ़ राजनांदगांव मार्ग पर संचालित क्रेशर प्लांट और चूना पत्थर खदानों की वजह से इलाके में गंभीर पर्यावरणीय और मानवीय संकट पैदा हो गया है।
सफेद धूल की मोटी परत ने ही किनारे के पेड़ पौधों को सफेद कर दिया है। खेतों की फसलें प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार केशर प्लांटों में बॉटर मिप्रंकलर और सुरक्षा घेरा न होने से धूल अनियंत्रित रूप से फैल रही है। हाइवे पर चलने वाले वाहनों को भी सफेद धूल से जूझना पड़ रहा है, दुस्यता कम हो जाती है और हादसों का खतरा बढ़ गया है। पेड़ों की पतिगां हरी नहीं, सफेद चूने की परत से ढकी दिखती हैं।
ब्लास्टिंग का खौफ
खदानों में सप्ताह में 2-3 बार होने वाली ब्लास्टिंग ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है। बिना पूर्व सूचना या मुनादी के विस्फोट होने से पत्थरों के टुकड़े बस्तियों एक पहुच जाते हैं। कच्चे सवालों में दरारें आ गई है. और बुजुर्ग लगातार हर में जो है। ग्रामीण बताते है कि ब्याट के समय उन्हें घर छोड़कर दूर जाना पड़ता है, कई बार तो हादसे भी हो चुके हैं।
पर्यावरण नियमों की अनदेखी कर रहे
प्रभावित गांव ठेलकाडीह, चवेली, महरूम, इमस्डीडकला, कलकसा और आसपास के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित है। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट संचालक पर्यावरण नियनों की अनदेखी कर रहे है न सेफ्टी उपाय, न पौधरोपण की सही देखभाल। कुछ पौधे बिना देखभाल के घर चुके हैं।
क्रेशर प्लांटों पर सख्त निगरानी हो
यह समस्या सिर्फ प्रदूषण तक सीमित नहीं है। यह स्थानीय निवासियों के स्वास्थ आजीविका और सुरक्षा पर सीधा असर डाल रही है। ग्रामीण अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि क्रेशर प्लांटों पर सख्त निगरानी हो, ब्लास्टिंग के लिए अनिवार्य पूर्व सूचना और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएं, पर्यावरण मानकों का पालन तय किया जाए।
खनिज विभाग की लापरवाही
इस गंभीर समस्या को लेकर चर्चा करने के लिए पत्रिका रिपोर्टर ने जिला खनिज अधिकारी के मोबाइल नंबर पर लगातार कॉल किया पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में खनिज संपदा को निगरानी कैसे हो रही हैं, जबकि अवैध उत्खनन जैसी शिकायते ऑन कॉल ही मिलती है। पूर्व सरपंच नोमेश वर्मा का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह इलाका धूल -धुंध और विस्फोटों को चपेट में पूरी तरह आ सकता है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जिला प्रशासन पर्यावरण विभाग जल्द हस्तक्षेप कर इस संकट को रोकेगा।
केशर प्लांट से पीड़ितों का बयान
केशर प्लांट के नजदीक रहने वाले स्थानीय निवासी ने बताया क्रेशर प्लांट से उड़ने वाली धूल के कारण हमें सांस लेने में भारी परेशानी होती है। घर के अंदर तक धूल भर जाती है, बच्चे और बुजुर्ग लगातार बीमार रहते हैं। क्रेशर की धूल से हमारी फसलें खराब हो रही हैं। खेतों में उत्पादन कम हो गया है और मवेशियों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है। हमारी आजीविका खतरे में है।
प्रशासन से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
हम कई बार प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ जाएंगे। धूल और प्रदूषण की वजह से पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। आंखों में जलन और खांसी हमेशा बनी रहती है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख शिकायतें
क्रेशर प्लांट से निकलने वाली धूल से फसलें और पेड़-पौधे नाष्ट हो रहे। ब्लास्टिंग से घरों को नुकसान, बच्चों में डर का माहौल अवैध उत्खनन और नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रशासनिक निरीक्षण के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं।
Updated on:
28 Jan 2026 10:16 pm
Published on:
28 Jan 2026 10:15 pm

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