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Alzheimer’s में नाम भूला, लेकिन प्यार रहा याद: 39 साल बाद पत्नी को फिर किया प्रपोज, दुबारा रचाई शादी

Enduring-Love: अल्जाइमर से जूझ रहे एक बुजुर्ग ने अपनी ही पत्नी को पहचाने बिना फिर से प्रपोज किया। 39 साल साथ रहने के बाद इस जोड़े ने केयर सेंटर में दुबारा शादी कर दुनिया को प्यार की नई मिसाल पेश की।

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भारत

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MI Zahir

Jan 27, 2026

Alzheimer's Marriage

दुबारा शादी के समय माइकल और लिंडा। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट, डिजाइन पत्रिका)

Unforgettable: प्यार से महकता वेलेंटाइन डे नजदीक आ रहा है और ऐसे में कैलिफोर्निया के बर्कले से एक ऐसी दिल छू लेने वाली खुशनुमा कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि प्यार में बहुत ताकत होती है। याददाश्त भले ही साथ छोड़ दे, लेकिन दिल का रिश्ता कभी नहीं मिटता (Memory Care Wedding)। 77 वर्षीय पूर्व वकील माइकल ओ-रेली, जो पिछले सात बरसों से अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी (Alzheimer's Marriage) से जूझ रहे हैं, वे अपनी पत्नी लिंडा फेल्डमैन (Michael O’Reilley Linda Feldman) को पहचान नहीं पाते और अक्सर भूल जाते हैं कि लिंडा उनकी पत्नी हैं, लेकिन उन्हें बस इतना याद है कि वे इस महिला से बहुत प्यार करते हैं।

अस्पताल में गूंजी आवाज,'मुझसे शादी करोगी' (Dementia Love Story)

नवंबर के महीने में जब 78 वर्षीय लिंडा अपने पति से मिलने के लिए उनके केयर सेंटर पहुंचीं, तो माइकल ने उन्हें पास बुलाया और पूछा— "क्या तुम मुझसे शादी करोगी?" लिंडा के लिए यह पल भावुक कर देने वाला था, क्योंकि वे 39 साल पहले ही माइकल की पत्नी बन चुकी थीं। उन्होंने बिना किसी झिझक के 'हाँ' कह दिया। केयर सेंटर 'द आइवी' के स्टाफ ने जब यह सुना, तो उन्होंने इस जोड़े के लिए एक वास्तविक शादी का आयोजन करने का फैसला किया।

कोर्ट रूम से शुरू हुई थी प्रेम कहानी

माइकल और लिंडा की मुलाकात 1979 में हुई थी, जब दोनों सार्वजनिक रक्षक (Public Defenders) के रूप में काम करते थे। माइकल एक शानदार वकील थे और लिंडा उनके टेलेंट की कायल थीं। शुरुआत में दोनों अच्छे दोस्त रहे, फिर तलाक के बाद उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं। माइकल की जिद और प्यार ने लिंडा का दिल जीत लिया और 1987 में उन्होंने पहली बार शादी की। बरसों तक दोनों ने साथ में दुनिया घूमी, बच्चों की परवरिश की और एक खुशहाल जीवन बिताया।

बीमारी ने बदली जिंदगी, पर कम नहीं हुआ प्यार

सात साल पहले जब माइकल को अल्जाइमर के बारे में पता चला, तो सब कुछ बदल गया। जो वकील बिना नोट्स के घंटों बहस करता था, वह अपने घर का रास्ता तक भूलने लगा। लिंडा ने बरसों तक घर पर उनकी सेवा की, लेकिन जब हालत बिगड़ी तो उन्हें स्पेशल केयर सेंटर में भर्ती कराया गया। लिंडा बताती हैं कि माइकल आज भी उन्हें देखते ही मुस्कुराते हैं और उनका हाथ थाम लेते हैं।

भावुक कर देने वाला विवाह समारोह

केयर सेंटर में 10 जनवरी को सजे एक सुंदर मंडप में, परिवार और दोस्तों की मौजूदगी में इस जोड़े ने दुबारा शादी की। माइकल की बेटी शेरोन ने इस विवाह की रस्में पूरी करवाईं। हालांकि, शादी के बाद जब विदाई का वक्त आया, तो लिंडा की आँखें भर आईं। उन्हें एहसास हुआ कि यह एक सुंदर 'फेयरीटेल' था, जिसके बाद माइकल को फिर से अपनी बीमारी की दुनिया में लौटना था। फिर भी, लिंडा कहती हैं कि यह कहानी उम्मीद की एक किरण है कि प्यार हर मुश्किल बाधा को पार कर सकता है।

हजारों लोग भावुक हो उठे

सोशल मीडिया पर आई इस खबर से हजारों लोग भावुक हो गए। लोग इसे "निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा" बता रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि डिमेंशिया के मरीजों में 'इमोशनल मेमोरी' (भावनात्मक यादें) अंत तक जीवित रह सकती हैं।

पहले से अधिक खुश और शांत रहते हैं माइकल

शादी के बाद माइकल के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखा गया है। केयर सेंटर के स्टाफ के अनुसार, वे पहले से अधिक खुश और शांत रहते हैं। लिंडा अब अपनी इस यात्रा पर एक संस्मरण लिखने पर विचार कर रही हैं ताकि अन्य परिवारों को प्रेरणा मिल सके।

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मुश्किल समय को प्रेम से खुशनुमा यादों में बदला जा सकता है

इस कहानी का एक पहलू यह भी है कि अल्जाइमर के मरीजों की देखभाल करने वालों (Caregivers) पर कितना मानसिक दबाव होता है। लिंडा की हिम्मत यह दर्शाती है कि धैर्य और प्रेम के साथ इस कठिन दौर को भी खुशनुमा यादों में बदला जा सकता है।

(वॉशिंगटन पोस्ट का यह आलेख Patrika.com पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है।)

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