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चिंता : खाद ने खराब की मिट्टी, धरती हो रही बंजर, जिले की मिट्टी में जिंक, सल्फर और ऑर्गनिक मैटर की 30 प्रतिशत से ज्यादा कमी

रासायनिक खाद और कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से हाइब्रिड बीजों से पैदावार भले ही बढ़ी हो, लेकिन अनाज में जरूरी पोषक तत्व लगातार कम हो रहे हैं। इससे लोगों को भोजन में पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है और वे जल्दी-जल्दी बीमार हो रहे हैं।

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सागर

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Reshu Jain

Dec 05, 2025

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खेतों में हो रहे रासायनिक खाद के इस्तेमाल से शरीर में घुल रहा है जहर

सागर. रासायनिक खाद और कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से हाइब्रिड बीजों से पैदावार भले ही बढ़ी हो, लेकिन अनाज में जरूरी पोषक तत्व लगातार कम हो रहे हैं। इससे लोगों को भोजन में पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है और वे जल्दी-जल्दी बीमार हो रहे हैं। इस वर्ष जिले की मृदा प्रशिक्षण लैब में 38113 मृदा परीक्षण किए गए हैं। जिसमें चौंकाने वाले आंकड़़े सामने आए हैं। उर्वरक और कीटनाशकों के चलते धरती में जिंक, सल्फर और ऑर्गेनिक मैटर की कमी आई है।जिला स्तर पर मृदा लैब प्रभारी जितेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि मार्च से लेकर दिसंबर तक में ही 38 हजार से किसानों के स्वाइल हेल्थ कार्ड बनाए गए हैं। सभी विकासखंड के लैब में मिट्टी का परीक्षण किया गया है। खरीफ सीजन और रबी सीजन में मिट्टी का परीक्षण हुआ है। मिट्टी में सल्फर 28 से 30 प्रतिशत कम और 30 से 32 प्रतिशत, कम पाया गया है। वहीं बोरॉन 18 से 20 प्रतिशत कम है। जिले में लगभग 5 लाख हेक्टेयर कृषि जमीन है, इसमें से 38 प्रतिशत से ज्यादा में पोषक तत्वों की कमी है। इसके साथ ही ऑर्गेनिक मैटर की भी कमी आई है। मिट्टी में पोषक तत्वों कमी से फलों, सब्जियों, अनाज और दालों में आवश्यक पोषक तत्वों में कमी आ रही है

डीएपी और यूरिया से बिगाड़ रहा संतुलन

सैंपल की जांच में सामने आया है कि किसानों की ओर से संतुलित उर्वरक उपयोग के बजाय एक ही प्रकार के उर्वरकों का उपयोग किया जा रहा है। मिट्टी में डीएपी और यूरिया का जरूरत से ज्यादा उपयोग खेतों में पोषक तत्वों का अनुपात बिगाड़ रहा है। इसी कारण मिट्टी में आवश्यक 16 पोषक तत्वों में से कई तत्वों की गंभीर कमी सामने आई है। इन पोषक तत्वों में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक, सल्फर, आयरन जैसे तत्वों की कमी मिली है।

जैविक खाद का प्रयोग करें किसान

जितेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार आवश्यक तत्वों को ही खेतों में किसान डालें। वहीं ऑर्गेनिक मैटर, जिंक और सल्फर की कमी को पूरा करने के लिए किसान गोबर खाद, केंचुआ खाद डालकर पूर्ति करें। इससे जमीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी। यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो जमीन बंजर भूमि में परिवर्तित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि लगातार मृदा परीक्षण कराए जा रहे हैं।

जिले में इतने किसानों के बने मृदा स्वास्थ्य कार्ड

सागर 4841

बीना 4098

राहतगढ़ 3738

खुरई 3750

जैसीनगर 3800

मालथोन 3622

केसली 2800

शाहगढ़ 2000

देवरी 3163र

हली 3493