
बांग्लादेश में चुनावी हिंसा। ( फोटो: AI)
Sushen Chandra: बांग्लादेश में आम चुनाव की तारीखें (Bangladesh Election 2026) जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, देश का राजनीतिक तापमान बढ़ने के साथ-साथ सांप्रदायिक हिंसा का ग्राफ भी तेजी से ऊपर जा रहा है। "लोकतंत्र के उत्सव" के बजाय, यह समय वहां के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए एक "डरावने सपने" में तब्दील हो गया है। ताजा मामला सुसेन चंद्र (Sushen Chandra) की निर्मम हत्या (Attacks on Hindus) का है, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बांग्लादेश में सत्ता चाहे किसी की भी हो, हिंदुओं की सुरक्षा हमेशा एक सवालिया निशान बनी रहती है। पुलिस रिपोर्ट और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सुसेन चंद्र को (Sushen Chandra Murder)उनके घर के पास ही निशाना बनाया गया। उपद्रवियों ने धारदार हथियारों से उन पर हमला किया। इस नृशंस हत्या को महज एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि चुनाव से पहले "डर का माहौल" (Bangladesh Violence) बनाने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है। मकसद साफ है-अल्पसंख्यकों को इतना डरा दो कि वे मतदान केंद्रों तक जाने की हिम्मत न जुटा सकें।
बांग्लादेश में चुनावी हिंसा का एक पैटर्न रहा है। जमात-ए-इस्लामी और अन्य कट्टरपंथी संगठन अक्सर ग्रामीण इलाकों में कमजोर हिंदू परिवारों को निशाना बनाते हैं। कभी ईशनिंदा के झूठे आरोप लगाकर तो कभी जमीनी विवाद का बहाना बनाकर हमले किए जाते हैं। सुसेन चंद्र की हत्या अकेली घटना नहीं है; पिछले एक महीने में देश के अलग-अलग हिस्सों से आगजनी, मूर्ति भंजन और मारपीट की खबरें लगातार आ रही हैं।
| तारीख (2026) | स्थान | घटना |
| 8 फरवरी | रंगपुर | सुसेन चंद्र की हत्या (घर के बाहर धारदार हथियार से हमला।) |
| 6 फरवरी | खुलना | मंदिर में तोड़फोड़ (मूर्तियों को खंडित किया गया।) |
| 5 फरवरी | चटगांव | दीपक साहा की दुकान में लूटपाट और आगजनी। |
| 3 फरवरी | लालमोनिरहाट | शिक्षक के परिवार पर हमला, महिलाओं से अभद्रता। |
| 1 फरवरी | बरिसाल | गौरव दास को चाकू मारा (चुनावी रैली के बाद।) |
| 30 जनवरी | दिनाजपुर | श्मशान भूमि पर स्थानीय दबंगों का कब्जा। |
| 28 जनवरी | मैमनसिंह | स्कूली छात्रा के अपहरण की कोशिश, पिता की पिटाई। |
| 26 जनवरी | फेनी | राधा-कृष्ण मंदिर पर पेट्रोल बम फेंका गया। |
| 24 जनवरी | सिलहट | अनंत कुमार पर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भीड़ का हमला। |
| 22 जनवरी | नोआखाली | 12 हिंदू घरों में सुनियोजित आगजनी। |
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, बांग्लादेशी प्रशासन इन हमलों को रोकने में विफल रहा है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई करने में देरी करती है, जिससे उपद्रवियों के हौसले बुलंद होते हैं। कई मामलों में तो पीड़ित परिवारों की एफआईआर (FIR) तक दर्ज नहीं की जाती।
हिंदू बौद्ध ईसाई एकिया परिषद: संगठन के महासचिव राणा दासगुप्ता ने कड़े शब्दों में कहा, "अगर सरकार हमें सुरक्षा नहीं दे सकती, तो हम संयुक्त राष्ट्र (UN) से हस्तक्षेप की मांग करेंगे। चुनाव के नाम पर हमारे लोगों की बलि स्वीकार नहीं की जाएगी।"
अंतरराष्ट्रीय समुदाय: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बांग्लादेश सरकार से तत्काल प्रभाव से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सुसेन चंद्र के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग की है।
विरोध प्रदर्शन: सुसेन चंद्र की हत्या के विरोध में आज ढाका के शाहबाग चौराहे पर अल्पसंख्यक संगठनों ने विशाल मशाल जुलूस निकालने का ऐलान किया है।
पुलिस का बयान: स्थानीय पुलिस प्रमुख ने दावा किया है कि सुसेन चंद्र हत्याकांड में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी फरार है।
बांग्लादेश में लगातार हो रही हिंसा का दूरगामी परिणाम 'पलायन' के रूप में सामने आ रहा है। 1947 में जहां बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में हिंदुओं की आबादी लगभग 28% थी, वह अब घट कर 8% से भी कम रह गई है। डर के कारण सीमावर्ती जिलों के कई परिवार अपनी पुश्तैनी जमीनें औने-पौने दाम पर बेचकर भारत या अन्य देशों में शरण लेने को मजबूर हो रहे हैं। यह हिंसा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि एक समुदाय को उसकी जड़ों से उखाड़ने की मनोवैज्ञानिक लड़ाई भी है।
Published on:
10 Feb 2026 06:15 pm
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