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एपस्टीन फाइल धमाके का असर: कौन हैं ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद की दावेदार शबाना मेहमूद, उनका भारत के बारे में क्या है नजरिया

Resignation:ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने दिया इस्तीफा, पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति पर ली जिम्मेदारी। एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद मैंडेलसन को किया गया था बर्खास्त।

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भारत

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MI Zahir

Feb 10, 2026

Keir Starmer and Shabana Mehmood

कीर स्टारमर और शबाना मेहमूद। (फोटो: X)

Peter Mandelson: ब्रिटेन की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) अपनी कुर्सी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और इसका कारण है कुख्यात 'एपस्टीन फाइल्स' (Epstein Files)। हालांकि कीर स्टार्मर का नाम सीधे तौर पर इन फाइलों में किसी अपराध के लिए नहीं है, लेकिन उन्होंने पीटर मैंडेलसन (Peter Mandelson) को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया था, जिनका नाम जेफरी एपस्टीन के साथ गहरे संबंधों के चलते सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस गलत फैसले ने कीर स्टार्मर की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और उनकी ही पार्टी के अंदर से इस्तीफे की मांग उठने लगी है। इस राजनीतिक अस्थिरता के बीच, एक नाम तेजी से उभर कर सामने आया है-शबाना मेहमूद (Shabana Mahmood)। यदि स्टार्मर को पद छोड़ना पड़ता है, तो शबाना मेहमूद ब्रिटेन की अगली प्रधानमंत्री बनने की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। अगर ऐसा होता है, तो वह ब्रिटेन की पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री होंगी। यहां शबाना महमूद की प्रोफाइल और उनके 'इंडिया कनेक्शन' पर एक विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

शबाना महमूद: प्रोफाइल और सियासी सफर

शबाना मेहमूद का जन्म 17 सितंबर 1980 को बर्मिंघम, इंग्लैंड में हुआ था। उनके माता-पिता पाकिस्तान के मीरपुर (जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर या PoK का हिस्सा है) से ब्रिटेन आए थे। बचपन का कुछ समय उन्होंने सऊदी अरब में भी बिताया।

शिक्षा और पेशा: शबाना ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के लिंकन कॉलेज से कानून की पढ़ाई की है और वह एक बैरिस्टर हैं।

राजनीतिक उदय: 2010 में वह बर्मिंघम लेडीवुड (Birmingham Ladywood) सीट से सांसद चुनी गईं और ब्रिटेन की पहली मुस्लिम महिला सांसदों में से एक बनीं।

वर्तमान स्थिति: वह वर्तमान में ब्रिटेन की गृह सचिव (Home Secretary) हैं। इससे पहले वह 'लॉर्ड चांसलर' और न्याय सचिव भी रह चुकी हैं। गृह सचिव के रूप में वह इमिग्रेशन (आप्रवास) और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को संभाल रही हैं। उन्हें लेबर पार्टी के भीतर एक सख्त और व्यावहारिक नेता माना जाता है।

इंडिया कनेक्शन: कश्मीर और कूटनीति

भारत के लिहाज से शबाना मेहमूद का प्रधानमंत्री बनना एक जटिल कूटनीतिक स्थिति पैदा कर सकता है। उनका 'इंडिया कनेक्शन' मुख्य रूप से उनके कश्मीरी मूल और भारत सरकार की नीतियों के प्रति उनके विरोध के कारण चर्चा में रहता है।

शबाना का कश्मीर पर सख्त रुख

शबाना मेहमूद अपनी मीरपुरी जड़ों के कारण कश्मीर मुद्दे पर बहुत मुखर रही हैं। जब भारत ने 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था, तब शबाना महमूद ने इसके खिलाफ लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लिया था। उन्होंने इसे "कश्मीरियों के साथ विश्वासघात" और "अवैध" बताया था।

यूके की संसद में उनका बयान

उन्होंने ब्रिटेन की संसद में कई बार कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका यह रुख भारत के इस स्टैंड के बिल्कुल विपरीत है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और यह द्विपक्षीय मुद्दा है।

इमिग्रेशन और भारतीय छात्रों का मामला

शबाना मेहमूद ने गृह सचिव (Home Secretary) के रूप में इमिग्रेशन पर सख्त रवैया अपनाया है। उनका कहना है कि ब्रिटेन में रहना "एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं"। उन्होंने वीजा नियमों को सख्त करने की वकालत की है, जिसका सीधा असर भारतीय छात्रों और पेशेवरों पर पड़ सकता है। हालांकि, विडंबना यह है कि प्रवासी माता-पिता की संतान होते हुए भी वह "वीजा नियमों के उल्लंघन" और "अवैध आप्रवास" के खिलाफ सबसे सख्त आवाज बन गई हैं।

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता (FTA)

लेबर पार्टी की सरकार भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) करने की इच्छुक है। यदि शबाना प्रधानमंत्री बनती हैं, तो उन्हें अपने व्यक्तिगत विचारों और देश के आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाना होगा। एक तरफ उनका कश्मीर पर पुराना रुख है, और दूसरी तरफ भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के साथ ब्रिटेन की व्यापारिक जरूरतें। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद उनकी भाषा बदल सकती है, क्योंकि तब उन्हें 'व्यक्तिगत राय' से ऊपर 'राष्ट्रीय हित' को रखना होगा।

मैकस्वीनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था

उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ, मॉर्गन मैकस्वीनी ने रविवार (8 फरवरी, 2026) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पीटर मैंडेलसन को वाशिंगटन में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने की सलाह देने की 'पूरी जिम्मेदारी' स्वीकार की है। दरअसल 30 जनवरी को जारी दस्तावेजों में यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन और मैंडेलसन के बीच गहरे संबंधों का खुलासा हुआ था, जिसके चलते मैंडेलसन को सितंबर में ही बर्खास्त कर दिया गया था।।

स्टार्मर की मुश्किल, शबाना का मौका ?

कीयर स्टार्मर के लिए 'एपस्टीन कनेक्शन' (मैंडेलसन की नियुक्ति) गले की हड्डी बन गया है। नैतिकता के आधार पर उन पर इस्तीफे का दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में लेबर पार्टी को एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो पार्टी को एकजुट रख सके। शबाना मेहमूद अपनी कानूनी समझ, तेजतर्रार छवि और पार्टी के भीतर मजबूत पकड़ के कारण इस रेस में आगे हैं।

शबाना का प्रधानमंत्री बनना एक बड़ा बदलाव होगा

भारत के लिए, ऋषि सुनक के बाद शबाना का प्रधानमंत्री बनना एक बड़ा बदलाव होगा। सुनक जहाँ अपनी हिंदू और भारतीय जड़ों पर गर्व करते थे, वहीं शबाना का कश्मीर कनेक्शन और पाकिस्तान के प्रति झुकाव नई दिल्ली और लंदन के रिश्तों में शुरुआती असहजता ला सकता है।