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साध्वी प्रेम बाईसा: अजमेर की आखिरी कथा और फिर ‘अलविदा’, आखिर क्या था वो ‘अग्निपरीक्षा’ का जिक्र?

साध्वी प्रेम बाईसा ने अपनी मृत्यु से ठीक पहले अजमेर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर जो बातें कहीं, वे अब उनकी 'डेथ मिस्ट्री' का सबसे बड़ा आधार बन गई हैं। उनके बयानों में भक्ति के साथ-साथ एक गहरा मानसिक दर्द और 'इंसाफ' की छटपटाहट साफ झलक रही थी।

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Sadhvi Prem Baisa

Sadhvi Prem Baisa (Photo Social Media)

Sadhvi Prem Baisa Death: राजस्थान की चर्चित युवा कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की बुधवार शाम जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वह मात्र 25 वर्ष की थीं और हाल ही में अजमेर में नौ दिवसीय भागवत कथा संपन्न कर लौटी थीं।

बता दें कि उनकी मौत को लेकर जहां परिजन 'गलत इंजेक्शन' का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, समर्थकों और प्रशंसकों में भारी आक्रोश है। साध्वी प्रेम बाईसा ने अपनी अंतिम कथा अजमेर में की थी। मंगलवार को ही वह नौ दिवसीय कार्यक्रम पूर्ण कर जोधपुर के आरती नगर स्थित अपने आश्रम लौटी थीं।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से वह सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक पुराने वीडियो और कुछ विवादों के कारण मानसिक तनाव में थीं। उनके अंतिम सोशल मीडिया पोस्ट में 'सनातन धर्म के लिए जीवन समर्पित करने' और अपनी 'अग्निपरीक्षा' देने जैसी बातों का जिक्र है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

इंजेक्शन के 5 मिनट बाद ही उखड़ने लगी सांसें

परिजनों के अनुसार, बुधवार सुबह साध्वी को सामान्य जुकाम और सांस लेने में तकलीफ थी। आश्रम में एक निजी कंपाउंडर को बुलाया गया, जिसने उन्हें एक इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के महज 5 मिनट के भीतर ही उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। उन्हें जोधपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें 'ब्रेन डेड' और मृत घोषित कर दिया।

मौत के बाद सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाया रहस्य

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब उनकी मृत्यु (शाम करीब 5:30 बजे) के 4 घंटे बाद रात करीब 9:30 बजे उनके इंस्टाग्राम हैंडल से एक भावुक पोस्ट शेयर की गई। इस पोस्ट में लिखा था, "मैं अपनी अग्निपरीक्षा देने जा रही हूं…जीते जी इंसाफ नहीं मिला, लेकिन अब शायद मिल जाए। सनातन धर्म के लिए मेरी विदाई स्वीकार करें।"

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि जब साध्वी की मृत्यु हो चुकी थी, तो उनका मोबाइल किसने चलाया और यह पोस्ट किसने की? क्या यह पोस्ट पहले से 'शेड्यूल' की गई थी या इसके पीछे किसी और का हाथ है?

जांच और कार्रवाई

सांसद हनुमान बेनीवाल सहित कई नेताओं ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। जोधपुर पुलिस ने आश्रम को सील कर दिया है और उस कंपाउंडर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जिसने इंजेक्शन लगाया था। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा। शुक्रवार को उनके पैतृक गांव परेऊ (बाड़मेर) में उन्हें समाधि दी गई।

बताते चलें कि अजमेर की नौ दिवसीय कथा मंगलवार (27 जनवरी 2026) को ही संपन्न हुई थी, जिसके अगले ही दिन बुधवार को उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रशंसकों का मानना है कि कथा के दौरान उनके चेहरे पर वह चिर-परिचित मुस्कान कम और एक अनकहा दर्द ज्यादा दिख रहा था।

अजमेर की कथा में उनके अंतिम बयान के प्रमुख अंश

'अग्निपरीक्षा' का जिक्र: कथा के दौरान और बाद में उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उन पर लगाए जा रहे आरोप झूठे हैं। उन्होंने कहा था, "मैं किसी भी तरह की अग्निपरीक्षा से गुजरने को तैयार हूं, ताकि सच सामने आ सके।" यह बयान उनके पिछले साल वायरल हुए एक विवादित वीडियो के संदर्भ में था, जिसने उन्हें मानसिक रूप से काफी आहत किया था।

सनातन धर्म के प्रति समर्पण: उन्होंने अपने अंतिम संबोधन में कहा, "मेरा सौभाग्य है कि मैंने सनातन धर्म में जन्म लिया और मेरी अंतिम श्वास भी सनातन के लिए ही होगी। दुनिया में सनातन से बड़ा कोई धर्म नहीं है।"

साजिश और मानसिक तनाव: कथा के समापन पर उन्होंने संकेतों में यह भी कहा था कि कुछ लोग उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं और उनके पुराने स्टॉफ के जरिए उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने भावुक होकर कहा था कि "जीते जी शायद मुझे इंसाफ न मिले, लेकिन ईश्वर सब देख रहा है।"

सोशल मीडिया पर 'अलविदा' संदेश: हालांकि, यह बयान उनकी मृत्यु के बाद उनके अकाउंट से पोस्ट हुआ, लेकिन माना जा रहा है कि यह उनके अजमेर से लौटने के बाद की भावनाओं का ही विस्तार था। इसमें लिखा था, "मैं अपनी अग्निपरीक्षा देने जा रही हूं…अब शायद इंसाफ मिल जाए।"

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