
Tikaram Jully vs madan dilawar
Rajasthan: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर अक्सर अपने बयानों और फैसलों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। इस बार उन्होंने बारां जिले के कोयला गांव में एक ऐसी घोषणा की है, जिसने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। मंत्री ने एलान किया है कि गायों को चराने वाले ग्वालों को अब 10,000 रुपये प्रति माह का वेतन दिया जाएगा। लेकिन उनकी इस स्कीम को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आड़े हाथों लिया है और इस बयान के बाद अब कंट्रोवर्सी शुरू हो गई है।
धार्मिक कथा के दौरान ग्रामीणों को संबोधित करते हुए दिलावर ने कहा कि गायों के संरक्षण के लिए यह कदम उठाना जरूरी है। हालांकि, इस सैलरी के साथ उन्होंने एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है। ग्वालों को 10,000 रुपये तभी मिलेंगे जब वे गायों को चरागाह भूमि (Pasture Land) पर चराएंगे। इसका उद्देश्य आवारा पशुओं की समस्या को कम करना और चरागाहों का सदुपयोग करना है।
दिलावर का यह दौरा केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा। मंडोला गांव की गाडिय़ा लुहार कॉलोनी में सफाईकर्मी गाडूलीबाई ने अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि सालों से काम करने के बावजूद उन्हें महज 1500 रुपये मिलते हैं, वह भी समय पर नहीं। मंत्री ने तुरंत सरपंच और बीडीओ को फोन कर बकाया भुगतान और कॉलोनी की नियमित सफाई के कड़े निर्देश दिए।
मंत्री के इस बयान पर राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखा हमला बोला है। जूली ने कहा कि प्रदेश में 3,768 स्कूल जर्जर इमारतों में चल रहे हैं, लेकिन उनके सुधार के लिए एक रुपया भी बजट नहीं दिया गया। जूली ने तंज कसते हुए कहा, "अच्छी एजुकेशन देंगे नहीं, तो बच्चे ग्वाला ही बनेंगे। सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय गोबर बेचने और गाय चराने में लगाना चाहती है।" उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में कई स्कूल मुर्गी फार्म में चलने को मजबूर हैं और शिक्षक भर्ती की घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित हैं।
Published on:
04 Feb 2026 12:05 pm
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