जैसलमेर, Jun 05, 2026

मोहनगढ़: अपने स्तर पर पानी की व्यवस्था करते ग्रामीण।
मोहनगढ़ कस्बे में पिछले कई दिनों से पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को पीने के पानी के लिए ट्रैक्टर-टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीणों को महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए कई बार संबंधित विभागों के समक्ष शिकायतें रखी गईं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि जल स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और बाड़मेर-मोहनगढ़ पेयजल योजना के अधिकारियों के बीच समन्वय के अभाव का सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार पेयजल योजना के अंतर्गत खराब पड़े वॉल्व की मरम्मत लंबे समय से लंबित है। दूसरी ओर जलदाय विभाग भी अपनी अधोसंरचना को दुरुस्त करने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहा है। विभागीय उदासीनता के कारण नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो पा रही है।
कस्बेवासियों ने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में चौबीसों घंटे पानी की उपलब्धता बनी रहती है, जबकि कई मोहल्लों में लोगों को पानी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। चौधरी चौराहे के आसपास पानी की अपेक्षाकृत अधिक आपूर्ति होने तथा कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पानी का खुले तौर पर उपयोग किए जाने पर भी लोगों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।
भीषण गर्मी के इस दौर में पेयजल संकट का असर केवल लोगों तक सीमित नहीं है। पशुधन को भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाने और समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
राज्य सरकार के वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 और कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान के तहत जल संरक्षण की दिशा में पहल की गई। ग्राम कनोई स्थित जीवनलाल की ढाणी में शुक्रवार को भामाशाहों के सहयोग से रामाणी कैलोरी तालाब के पुनरुद्धार कार्य का शुभारम्भ किया गया। अभियान के अंतर्गत, वीर आश्रम सेवा समिति के सहयोग से तालाब से लगभग 200 ट्रैक्टर मिट्टी हटाकर उसकी जल संरक्षण एवं जल संग्रहण क्षमता बढ़ाई गई है। यह पहल क्षेत्र में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देगी और आसपास के पशुधन के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। गांव से दूर जंगल क्षेत्र में स्थित यह ढाणी पशुओं के लिए पेयजल का एक प्रमुख स्रोत है। तालाब के इस पुनरुद्धार से स्थानीय ग्रामीणों एवं पशुपालकों को विशेष लाभ मिलेगा, साथ ही जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को भी बल मिलेगा।
Published on: 05 Jun 2026 08:54 pm

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