जैसलमेर, Jun 05, 2026

गर्मी से बचाव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में घासफूस के बनाए जाते हैं घर एवं छप्पर
रेगिस्तानी इलाकों में बढ़ते तापमान के बीच स्थानीय स्तर पर तैयार हो रहे इनोवेशन अब नए सामाजिक-तकनीकी ट्रेंड के रूप में सामने आ रहे हैं। पारंपरिक संसाधनों और स्थानीय समझ का उपयोग कर लोग ऐसे कूलिंग मॉडल विकसित कर रहे हैं जो कम खर्च में अधिक राहत देने की क्षमता रखते हैं। हालिया स्थानीय आकलनों के अनुसार, जब तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, तब भी इन घरेलू समाधानों से घरों के अंदर महसूस होने वाला तापमान लगभग 5 से 8 डिग्री तक कम पाया गया। साथ ही सामान्य इलेक्ट्रिक कूलिंग सिस्टम की तुलना में खर्च में करीब 55 से 60 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।
-मिट्टी, कपड़ा और घास आधारित संरचनाओं का उपयोग बढ़ा
-पारंपरिक कूलिंग तकनीकें पुनः लोकप्रिय हो रही
-सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इनोवेशन मॉडल तेजी से साझा
- ग्रामीण घरों में ऊर्जा बचत आधारित समाधान अपनाए जा रहे
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र चौधरी मानते हैं कि यह बदलाव केवल गर्मी से राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा खपत में कमी और जलवायु अनुकूल जीवनशैली की ओर संकेत करता है। उनके अनुसार स्थानीय संसाधनों पर आधारित तकनीकें भविष्य में बड़े पैमाने पर स्थायी समाधान बन सकती हैं।
ऊर्जा विश्लेषक अभियंता मनीष सैनी का कहना है कि यदि ऐसे मॉडल्स को तकनीकी सपोर्ट और प्रशिक्षण मिले तो रेगिस्तानी क्षेत्रों में कूलिंग लागत में और भी बड़ी गिरावट संभव है। यह प्रवृत्ति स्थानीय ज्ञान को फिर से केंद्र में ला रही है और आधुनिक शहरी डिजाइन पर भी प्रभाव डाल सकती है।
जैसलमेर. राज्य सरकार के वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 और कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान के तहत जल संरक्षण की दिशा में पहल की गई। ग्राम कनोई स्थित जीवनलाल की ढाणी में शुक्रवार को भामाशाहों के सहयोग से रामाणी कैलोरी तालाब के पुनरुद्धार कार्य का शुभारम्भ किया गया। अभियान के अंतर्गत, वीर आश्रम सेवा समिति के सहयोग से तालाब से लगभग 200 ट्रैक्टर मिट्टी हटाकर उसकी जल संरक्षण एवं जल संग्रहण क्षमता बढ़ाई गई है। यह पहल क्षेत्र में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देगी और आसपास के पशुधन के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। गांव से दूर जंगल क्षेत्र में स्थित यह ढाणी पशुओं के लिए पेयजल का एक प्रमुख स्रोत है। तालाब के इस पुनरुद्धार से स्थानीय ग्रामीणों एवं पशुपालकों को विशेष लाभ मिलेगा, साथ ही जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को भी बल मिलेगा। इस अवसर पर कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान के नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ भू-जल वैज्ञानिक नारायण दास इणखिया सहित आसपास की ढाणियों के ग्रामीण एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। वीर आश्रम सेवा समिति के सचिव महेन्द्र बोड़ावट ने बताया कि समिति आगामी वर्षा ऋतु के पश्चात इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान भी चलाएगी।
Published on: 05 Jun 2026 08:27 pm

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