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किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो—61 …. किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 61 में भेजी गई बच्चों की लिखी रोचक ये कहानियां सभी कहानियाें में उत्कृष्ट रहीं।

किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो—61 .... किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 61 में भेजी गई बच्चों की लिखी रोचक ये कहानियां सभी कहानियाें में उत्कृष्ट रहीं।

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जयपुर

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Tasneem Khan

Jan 15, 2026

जादुई पेड़ की कहानी
हर्षिल सोनी, उम्र-7 वर्ष
एक बगीचे मे एक जादुई पेड़ था उस जादुई पेड़ को हमेशा एक आदमी पानी देने आता था धीरे धीरे पेड और आदमी की दोस्ती गहरी होती गई और वह फिर उसे आदमी को पानी के बदले हर रोज जादुई फल देता था। जिससे उसकी भूख शांत होती थी। एक दिन उस आदमी के मन में लालच आ गया उसने सोचा कि मैं इस पेड़ को काट के सारे जादुई फल ले लूंगा और उसी दिन पेड़ को पता भी चल गया वह आदमी उसे हमेशा के लिए काटने वाला है और इसलिए वह वहां से हमेशा के लिए गायब हो गया।
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प्रकृति भी हमें दोगुना प्यार वापस देती है।
प्रवीण कुमार, उम्र-11 वर्ष
एक गांव में रामू नाम का एक किसान रहता था। रामू बहुत ही दयालु स्वभाव का था। उसके घर के पास एक पुराना विशाल पेड़ था। वह पेड़ केवल छाया ही नहीं देता था, बल्कि उसमें एक अनोखी बात थी। उसकी अपनी एक भावना थी। गर्मी का मौसम था और चारों ओर सूखा पड़ा था। रामू ने देखा कि उसके आंगन का वह पेड़ प्यास के कारण कुम्हला रहा है। रामू तुरंत एक घड़ा पानी लेकर आया और बड़े प्यार से पेड़ की जड़ों में डालने लगा। पेड़ को पानी मिलते ही जैसे उसमें नई जान आ गई। वह मुस्कुरा उठा और अपनी टहनियों को हिलाकर रामू का आभार व्यक्त करने लगा। अगले ही पल पेड़ ने अपनी एक टहनी झुकाई और रामू को एक सुंदर, मीठा फल भेंट किया। रामू यह देखकर चकित रह गया कि जब हम प्रकृति की देखभाल करते हैं, तो प्रकृति भी हमें दोगुना प्यार वापस देती है।
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सभी बहुत खुश थे
भाविका, उम्र-7 वर्ष
एक गांव था। उस गांव का नाम बायतु था। उसी गांव में ओम नाम का एक आदमी रहता था। वह बैठे-बैठे आम खाने के बारे में सोच रहा था। उसने सोचा मैं आम का पेड़ लगा लेता हूं और वह मैदान में गया। उसको वहां आम की गुठली मिली। वह खुश हुआ और वह दौड़कर आम की गुठली के पास पहुंचा। उसने आम की गुठली उठाई और मैदान की तरफ गया। वहां उसने गड्ढा खोदकर आम की गुठली अंदर डाली और उसके ऊपर मिट्टी डाल दी और उसमें पानी डाल दिया। वह हर रोज पानी डालने लगा। वहां आम का पेड़ निकल गया। धीरे-धीरे पेड़ बड़ा हो गया और आम देने लगा। उसने अपने सभी दोस्तों को बुलाया और वह मिलकर आम खाते थे। वह सभी बहुत खुश थे।
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बरगद और रामू दादा
हृदयांश पंचैली, उम्र-11 वर्ष
गांव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे रामू दादा रोज़ाना बैठते थे। वह अपनी मोटी मूंछों और सफ़ेद पारंपरिक कपड़ों के लिए जाने जाते थे। उनके हाथ में एक मिट्टी का घड़ा होता था। जिसमें वह पेड़ से गिरी हुई सूखी टहनियां और पत्तियां इकट्ठा करते थे। यह उनका रोज़ का काम था। पेड़ के आस-पास की सफ़ाई करना। लोग कहते थे कि दादाजी पेड़ को अपना दोस्त मानते थे और उसकी देखभाल करना उन्हें शांति देता था। वह चुपचाप अपना काम करते रहते। किसी से कुछ नहीं कहते, बस अपने काम में मगन रहते थे।
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मैं सबको फल और हवा देता हूं
ऋशांत शर्मा, उम्र- 9 वर्ष
एक गांव में एक बड़ा सा पेड़ था। वह पेड़ बहुत अच्छा था। उसके पास एक चिड़िया, एक गिलहरी, एक कुत्ता, एक गाय और एक बच्चा रहता था। एक दिन लकड़हारा कुल्हाड़ी लेकर आया। चिड़िया बोली, “पेड़ मत काटो।” गिलहरी बोली, “यह मेरा घर है।” गाय बोली, “मुझे छाया मिलती है।” कुत्ता भौंकने लगा। पेड़ बोला, “मैं सबको फल और हवा देता हूं।” बच्चे ने कहा, “पेड़ नहीं होंगे तो हम कैसे जिएंगे?” लकड़हारे को अपनी गलती समझ आ गई। उसने कुल्हाड़ी रख दी और माफी मांगी। फिर सब खुश हो गए और बच्चे ने नया पौधा लगाया।
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पेड़ और चंपू की मित्रता
हृदयांश बरवर,उम्र- 8 वर्ष
एक पुराने समय की बात है चंपू नाम का एक आदमी था वह रास्ते से जा रहा था वहां एक फल वृक्ष देखा उसे फल को देखा तो देखा तो वह बहुत मुरझाया हुआ था चंपू चंपू ने उसे फल वृक्ष से पूछा कि तुम पर बहुत सारे मीठे मीठे फल भी लगे हुए हैं फिर भी मुरझाए हुए क्यों हो तब पेड़ ने कहा कि मुझे कोई पानी भी नहीं पिलाते हैं और मेरे पर पत्थर की मार मार कर फल तोड़ते हैं चंपू ने पेड़ को बोला कि अब मैं तुम्हें अपनी भी पिलाऊंगा और किसी को पत्थर की मरने भी नहीं दूंगा और उन लोगों को बोलूंगा कि आप भी इस पेड़ को पानी पिलाओगे तो यह पेड़ आपको खाने को मीठे मीठे फल देगा उसके बाद पेड़ को सब लोग पानी देने लग गए और पेड़ उनको मीठे मीठे फल देने लग गया चंपू और पेड़ दोनों आपस में मित्र बन गए।
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दोनों आपस में बहुत प्रेम करती थी
ओबलेश प्रजापत,उम्र-11 वर्ष
एक समय की बात है एक घर में दो बहने रहती थी। एक बड़ी थी और एक छोटी थी। बड़ी का नाम था पूजा और छोटी का नाम था खुशी। दोनों आपस में बहुत प्रेम करती थी उनके माता-पिता कहीं गए हुए थे छोटी बहन बहुत शैतानी करती थी और बड़ी बहन उसे समझती थी और बड़ी बहन उसे डांटती थी, प्यार भी करती थी। छोटी बहन इतनी शैतानी करती थी कि कचरा ही फैला देती थी। फिर एक दिन उसकी बहन ने देखा था की छोटी बहन खुशी बहुत शैतानी कर रही है। छोटी बहन खुशी ने ड्रेसिंग टेबल पर रखें हुए अखबार के टुकड़े टुकडे़ करके घर की फर्श पर फैला रखा था। फिर उसकी बड़ी बहन पूजा अचानक आई उसने ने देखा था कि फर्श पर बहुत सारा कचरा फैला हुआ है। फिर उसको गुस्सा आया फिर उसने छोटी बहन को डांटा बड़ी बहन ने छोटी बहन को समझाया बड़ी बहन पूजा ने खुशी को समझाया कि बेटा ऐसे कचरा नहीं करते। मम्मी आएगी तब आपको और मुझे दोनों को डांटेगी मम्मी आने से पहले आप साफ करो फिर छोटी बहन खुशी झाडू लेकर पहुंच गई और साफ करने लगी। उसे सही तरीके से सफाई नहीं हो रही थी क्योंकि वह छोटी थी फिर भी उसने साफ किया।
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एक जादूई पेड़ था
तनीषा बडगोती, उम्र-11 वर्ष
बहुत समय पहले की बात है एक छोटा लड़का था। उसका नाम राम था वह बहुत गरीब था | उसके पास एक छोटा सा घर था। उसके घर के आंगन में एक छोटा सा पेड़ था। राम उस पेड़ से बहुत प्यार करता था। राम उसकी देखभाल बहुत अच्छे से करता था और रोजाना पानी डालता था। धीरे-धीरे समय बीतता गया। राम और पेड़ बड़े हो गए। उनके घर के आसपास बहुत हरियाली थी लेकिन वह पेड़ सबसे बड़ा और अनोखा था। वह एक जादूई पेड़ था क्योंकि वह सुन सकता था, देख सकता था और बोल सकता था। पेड़ पानी के बदले उसे रोज एक सोने का फल देता था। फिर राम की शादी हो गई कुछ समय बाद उसका एक लड़का हुआ। उसका नाम श्याम था जब राम की मृत्यु हो गई तब शाम भी उस पेड़ की देखभाल करने लगा। बदले में पेड़ उसे भी एक सोने का फल देता था। धीरे-धीरे श्याम के मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि यह पेड़ मुझे रोजाना एक ही सोने का फल देता है इसका मतलब इसके अंदर बहुत से सोने के फल होंगे। वह इसी लालच में आकर पेड़ काट देता है पर उस पेड़ के अंदर कुछ भी नहीं निकलता है और उसे अपने किए पर बहुत पछतावा होता है |
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बरगद और रामू दादा
हृदयांश पंचैली, उम्र-11 वर्ष
गांव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे रामू दादा रोज़ाना बैठते थे। वह अपनी मोटी मूंछों और सफेद पारंपरिक कपड़ों के लिए जाने जाते थे। उनके हाथ में एक मिट्टी का घड़ा होता था। जिसमें वह पेड़ से गिरी हुई सूखी टहनियां और पत्तियां इकट्ठा करते थे। यह उनका रोज का काम था। पेड़ के आस-पास की सफ़ाई करना। लोग कहते थे कि दादाजी पेड़ को अपना दोस्त मानते थे और उसकी देखभाल करना उन्हें शांति देता था। वह चुपचाप अपना काम करते रहते। किसी से कुछ नहीं कहते बस अपने काम में मगन रहते थे।
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पेड़ रो रहा हो
प्रियांशु पटेल, उम्र- 8 वर्ष
एक गांव में एक पुराना बरगद का पेड़ था। वह बहुत दयालु था और गांव के बच्चों को छाया फल और ठंडी हवा देता था। उसी गांव में चिंटू नाम का एक लड़का रहता था। जिसे लकड़ी काटने की आदत थी। एक दिन वह कुल्हाड़ी लेकर उसी बरगद के पास आया। जब चिंटू ने कुल्हाड़ी उठाई तो पेड़ बोला “बेटा मुझे मत काटो। मैं तुम्हें फल देता हूं, पक्षियों को घर देता हूं और तुम्हें धूप से बचाता हूं।” चिंटू को लगा जैसे पेड़ रो रहा हो। उसने ध्यान से देखा तो सच में पेड़ से हरे-हरे पत्ते झर रहे थे, जैसे आंसू हों। चिंटू का दिल पसीज गया। उसने कुल्हाड़ी नीचे रख दी। उसी समय अचानक तेज हवा चली और पास का छोटा पौधा गिरने लगा। बरगद ने अपनी मजबूत शाखाओं से उसे संभाल लिया। यह देखकर चिंटू को समझ आ गया कि पेड़ कितने उपयोगी होते हैं। चिंटू ने पेड़ से माफी मांगी और वादा किया कि वह अब कभी पेड़ नहीं काटेगा। उसने गांव के बच्चों को भी समझाया और सभी ने मिलकर नए पौधे लगाए। कुछ साल बाद वही पौधे बड़े पेड़ बन गए और गाँव हरा-भरा हो गया। बरगद खुश था और चिंटू गर्व से मुस्कुरा रहा था।
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पेड़ की मुस्कान
पहल रूनवाल, उम्र-8 वर्ष
एक हरे-भरे मैदान में एक पुराना पेड़ खड़ा था। उसकी मोटी डालियां दूर तक फैली थीं और पत्तियां धूप को ज़मीन तक आने से रोकती थीं। उसी मैदान में एक छोटा बच्चा रोज खेलने आता था। वह पेड़ को अपना दोस्त मानता था। एक दिन बच्चे ने देखा कि गर्मी बहुत ज़्यादा है और पेड़ के पास की ज़मीन सूख गई है। कुछ पत्तियां पीली पड़ने लगी थीं। बच्चे को लगा जैसे पेड़ उदास है। वह तुरंत घर गया और पानी से भरा घड़ा लेकर वापस आया। उसने प्यार से पेड़ से कहा, “मैं हूं न, तुम्हें कुछ नहीं होगा।” फिर उसने धीरे-धीरे पानी जड़ों में डाल दिया। थोड़ी ही देर में ठंडी हवा चलने लगी। पत्तियां हिलने लगीं और ऐसा लगा मानो पेड़ मुस्करा रहा हो। कुछ दिनों बाद वही पेड़ और भी हरा हो गया। उस पर छोटे-छोटे फल लग आए। बच्चे की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। एक दिन पेड़ से एक फल नीचे गिरा। बच्चे ने उसे उठाकर कहा, “यह तुम्हारा धन्यवाद है।”धीरे-धीरे गांव के और बच्चे भी उस पेड़ की देखभाल करने लगे। कोई पानी देता, कोई कूड़ा साफ करता। पेड़ फिर से गांव की शान बन गया। बच्चे ने सीखा कि अगर हम प्रकृति की थोड़ी सी भी देखभाल करें, तो वह हमें कई गुना खुशियां देती है।
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प्यार और सेवा का उपहार
प्रियांशी सोढ़ानी, उम्र- 5 वर्ष
एक बच्चा अपने बगीचे में एक पुराने पेड़ के पास खड़ा था। पेड़ पर एक बड़ा रसभरा फल पक रहा था। बच्चे ने सोचा कि वह फल कैसे खाए लेकिन वह पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता था। उसने एक घड़े में पानी भरकर पेड़ की जड़ में डालना शुरू किया। उसकी इस देखभाल से पेड़ खुश हुआ और फल खुद ही नीचे गिर गया। बच्चा खुशी से फल उठाकर खा गया और सीखा कि प्यार और सेवा से बड़ा कोई उपहार नहीं होता।
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पेड़ का सच्चा साथी
प्रियांशी गुसाईवाल, उम्र- 9 वर्ष
एक बार की बात है एक बूढ़ा आदमी रोज पुराने पेड़ के नीचे बैठता था। पेड़ का तना चेहरे जैसा लगता आंखें, नाक और मुस्कान। एक दिन बूढ़ा उदास था। बेटा शहर जाकर भूल गया। वह रोने लगा। पेड़ ने पत्तियां सरसलाईं और बोला “बाबा, रो मत। मैं दो सौ साल से खड़ा हूं। कितने आए-गए, मैं अडिग रहा।”बूढ़ा चौंका, “तुम बोलते हो?” पेड़ बोला, “दिल से सुनने वाले को जवाब देता हूं। जड़ें मजबूत रखो।” तब से बूढ़ा रोज़ पेड़ से बतियाता। अकेलापन गया, सच्ची दोस्ती हो गई।
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उसे पेड़ लगाना बहुत पसंद था
इशिका गुर्जर, उम्र- 10 वर्ष
दानपुर गांव में रामू नाम का आदमी रहता था। उसे पेड़ लगाना बहुत पसंद था। उसके घर के पीछे एक बहुत बड़ा और सुंदर बगीचा था। वह रोज सुबह उठकर बगीचे की साफ सफाई और सभी पेड़ों को पानी देता था। रामू के बच्चे पेड़ से फल तोड़कर अपने दोस्तों को देता था। रामू को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था। एक दिन रामू ने बच्चों को फल तोड़ते हुए पकड़ लिया। रामू ने बच्चों को बहुत पीटा फिर भी बच्चे रोज अपने दोस्तों के लिए फल ले जाते थे। 1 दिन रामू को एक उपाय सुजा और रामू ने बच्चों से बोला आज से फल उसी को मिलेंगे जो रोज पेड़ों में पानी देगा बच्चों को यहा उपाय अच्छा लगा। रोज वह पेडों को पानी देने लगे और दोस्तों को फल ले जाने लगे बच्चों को अब पेड़ों में पानी देना और पेड़ लगाना अच्छे लगने लगे।
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कृतज्ञ पेड़ और दयालु रामू
भाविका शर्मा, उम्र- 11 वर्ष
एक छोटे से गांव में रामू नाम का एक सीधा-सादा माली रहता था। रामू को पेड़-पौधों से बहुत लगाव था। उसके बगीचे में एक पुराना विशाल पेड़ था। गांव के लोग उसे सूखा और बेकार समझते थे। लेकिन रामू रोज नियम से उस पेड़ की जड़ों में पानी डालता और उसकी देखभाल करता था। एक दिन जब रामू पेड़ को पानी दे रहा था। तो उसे एक चमत्कार का अहसास हुआ। जैसे ही पानी की धार पेड़ की जड़ों को छुई पेड़ के तने पर एक मुस्कुराता हुआ चेहरा उभर आया। वह एक 'बोलता हुआ कल्पवृक्ष' था। पेड़ ने अपनी आंखें खोलीं और रामू की ओर देखकर धीरे से मुस्कुराया। रामू पहले तो थोड़ा घबराया लेकिन पेड़ की सौम्य मुस्कान ने उसका डर दूर कर दिया। पेड़ ने कहा, "रामू, तुम्हारी निस्वार्थ सेवा ने मुझे पुनर्जीवित कर दिया है। जब सबने मुझे त्याग दिया था, तब तुमने मुझे जीवन दिया।" कृतज्ञता प्रकट करने के लिए पेड़ ने अपनी एक टहनी झुकाई और रामू को एक जादुई सुनहरा फल भेंट किया। वह फल न केवल स्वादिष्ट था, बल्कि उसे खाने के बाद रामू की सारी थकान और बीमारियां दूर हो गईं। उस दिन के बाद से रामू और उस पेड़ की दोस्ती और गहरी हो गई। रामू ने सीखा कि प्यार और देखभाल से सूखे तने में भी जान फूंकी जा सकती है। गांव वालों ने भी यह देखकर पेड़ों का सम्मान करना शुरू कर दिया।
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पेड़ की सीख
अथर्व सिसोदिया, उम्र- 7 वर्ष
एक गांव में मोहन नाम का एक किसान रहता था। उसके घर के पास एक बहुत पुराना और फलदार पेड़ था। उस पेड़ से न केवल फल मिलते थे, बल्कि गर्मी में उसकी छाया से राहगीरों को आराम भी मिलता था। गाँव के बच्चे भी उसी पेड़ के नीचे खेलते थे। एक दिन मोहन ने सोचा कि अगर वह इस पेड़ को काट दे तो लकड़ी बेचकर उसे अच्छे पैसे मिल सकते हैं। लालच में आकर वह कुल्हाड़ी लेकर पेड़ काटने लगा। जैसे ही उसने पहला वार किया पेड़ से आवाज आई “मुझे मत काटो, मैं तुम्हें फल, छाया और ठंडी हवा देता हूं।” मोहन को लगा जैसे पेड़ उससे बात कर रहा हो। उसे अपने किए पर शर्म आने लगी। उसने सोचा कि उसने कभी इस पेड़ का धन्यवाद नहीं किया, बल्कि आज उसे काटने चला है। मोहन ने तुरंत कुल्हाड़ी नीचे रख दी और पेड़ से माफी मांगी। उस दिन के बाद मोहन ने उस पेड़ की देखभाल शुरू कर दी। वह उसमें पानी डालता, खाद देता और दूसरों को भी पेड़ न काटने की सीख देता। समय के साथ उस पेड़ से और भी अधिक फल मिलने लगे। मोहन को समझ आ गया कि प्रकृति हमारी मां की तरह है। अगर हम उसकी रक्षा करेंगे, तो वह हमें जीवन भर सब कुछ देती रहेगी।
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शायद पेड़ को प्यास लगी है
जीनल, उम्र- 10 वर्ष
एक दिन रामू गांव के पास जंगल में गया। वहां एक बड़ा सा पुराना पेड़ था। लेकिन उस दिन वह उदास लग रहा था। उसकी पत्तियां झुकी हुई थीं। रामू ने सोचा शायद पेड़ को प्यास लगी है। रामू घर से एक छोटे घड़े में पानी लाया। पेड़ को जैसे ही रामू दिखा वह खुश हो गया ऐसा लगा जैसे पेड़ मुस्करा रहा हो। रामू ने प्यार से कहा, पेड़ दादा लो पानी पी लो, आप हमें छाया देते हो, फल देते हो, लकड़ी भी देते हो। रामू ने पानी पेड़ की जड़ों में डाल दिया। थोड़ी हवा चली एक फल सीधा रामू के हाथ में गिरा और पत्तियां हिलने लगीं। ऐसा लगा जैसे पेड़ रामू को धन्यवाद कह रहा हो। रामू बहुत खुश हुआ। उसने सोचा अगर हम पेड़ों का ध्यान रखें तो पेड़ भी हमारा ध्यान रखेंगे। अगले दिन रामू अपने दोस्तों को भी वहां ले गया सबने मिलकर पेड़ में पानी डाला पेड़ कुछ दिनों में पहले से अधिक हरा-भरा हो गया पक्षी चहचहाने लगे। रामू ने ठान लिया कि वह रोज़ पेड़ों को पानी देगा।
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खेजड़ली गांव का खेजड़ी पेड़
माही खंगार, उम्र-11 वर्ष
एक गांव था उस गांव का नाम खेजड़ली था उस गांव में खेजड़ी का एक पेड़ था उस गांव में रामू नाम का एक आदमी था वह एक गरीब किसान था रामू रोज खेजड़ी के पेड़ पर जल और एक फल जरुर चढ़ता था एक दिन रामू जल और फल चढ़ा रहा था तभी उसे एक आवाज आई रामू! रामू इधर-उधर देखने लगा फिर से वही आवाज आई रामू! रामू बोला कौन है?जो बार-बार मेरा नाम पुकार रहा है रामू मैं हूं पेड़ रामू तुम मुझे रोज एक फल और जल क्यों चढ़ाते हो? रामू बोला मैं एक गरीब किसान हूं और मेरा एक खेत है सुबह-सुबह में पहले आपके पेड़ पर जल और फल चढ़ता हूं फिर मैं बाजार में सब्जियां बेचने जाता हूं परंतु मेरी सब्जियां बिकती ही नहीं है मुझे तो समझ ही नहीं आता मैं क्या करूं? पेड़ बोला मैं तुम्हें एक बीज देता हूं तुम इसे अपने खेत में बो देना अगले दिन रामू ने उस बीच को अपने खेत में बो दिया फिर एक चमत्कार हुआ उसकी सब्जियां रोज बिकने लगी उसने पेड़ को धन्यवाद कहा।
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आम का पेड़ और किसान
यतिका मीणा उम्र- 7 वर्ष
एक बार की‌ बात है। एक चमनपुर नाम का गांव था। गांव में एक किसान रहता था। उसका नाम राम था राम उसने अपने बगीचे में मेहनत से एक आम का पेड़ उगाया। एक दिन राम अपना खेत जोत रहा था। खेत जोतते-जोतते राम को भूख लगी। वह अपना खाना लाना भूल गया और राम के घर पर ताला था और चाबी उसकी बहन के पास थी उसकी बहन दूर के खेत में थी। राम को याद आया उसने बगीचे में आम का पेड़ उगाया था। वह बगीचे में गया और राम ने कहा, पेड़ क्या तुम मुझे फल दोगे? पेड़ ने कहा तुम मुझे अपनी दो मैं तुम्हें फल दूंगा, राम के पास पानी का घड़ा था। उसे घड़े में जितना भी पानी था राम ने सारा पानी पेड़ की जड़ों में डाल दिया फिर पेड़ ने उसे फल दिया राम खुशी-खुशी फल खाकर अपना काम करने चला गया।
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किसान और जादूई पेड़न
किस्वा फातिमा, उम्र-13 वर्ष
किसान और जादूई पेड़ एक गांव में गरीब किसान रहता था। लेकिन उसके खेत में फसल अच्छी नहीं होती थी। एक दिन उसने अपने खेत के कोने में एक छुटा पौधा देखा रामू ने सोचा शायद ये पौधा मेरे लिए भाग्यशाली हो। उसने पानी देना शुरू कर दिया। रामू हर दिन हमें पौधे की देख भाल करता। पानी देता और खाद डालता कुछ ही हफ़्तों में वह छोटा पौधा एक बड़े में और हरे भरे पेड़ में बदल गया। सबसे खतरनाक बात ये है कि उस पेड़ पर सुनहरे कद्दू उगने लगे रामू ने एक कद्दू तोड़ा और उसने बाज़ार में बेच दिया उसे बहुत अच्छे पैसे मिले। अब रामू अमीर हो गया था। उसने अपने लिए एक घर बनवाया और गांव वालों की मदद भी की। एक दिन एक लालची व्यापारी ने उस पेड़ के बारे में सुना वो रामू के पास आया और उसके पेड़ बेचने के लिए मोटी रकम देने को पेश किया। लेकिन रामू ने मना कर दिया। यहां पेड़ मेरे लिए सिर्फ धन का स्त्रोत नहीं बल्कि मेरी मेहनत का फल और मेरा साथी भी है। व्यापारी निराश होकर चला गया रामू ने समझदारी से काम लिया और हर साल पेड़ से कद्दू बेच कर खुशी खुशी जीवन बिताया।
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कभी लालच नहीं करना चाहिए
रीवा शिवरान, उम्र - 9 वर्ष
एक बार एक रतनलाल नाम का किसान था। वह रोज एक पेड़ में पानी डालता था। पेड़ बदले में उसे एक फल देता था। वह किसान फल पाकर बहुत खुश हो जाता था। एक बार उसे किसी जरूरी काम से दूसरे गांव जाना पड़ा। वह अपने बेटे को पेड़ में पानी डालने के लिए कह कर गया। लड़के ने जब पेड़ में पानी डाला तो पेड़ ने फल दिया। यह देखकर लड़के के मन में लालच आ गया। उसने बहुत सारे फल पाने के लिए पेड़ को जोर-जोर से हिलाया जिससे उसके सारे कच्चे फल और पत्तियां नीचे गिर गए। किसान ने आकर देखा तो वह बहुत दुखी हुआ। उसने अपने बेटे को समझाया कि कभी लालच नहीं करना चाहिए।
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पेड़ और इंसान
अल्फिया, उम्र- 3 वर्ष
एक गांव में एक हरा-भरा पेड़ था। उस पेड़ से साफ पानी निकलता था। एक आदमी रोज़ आकर पेड़ से पानी लेता था। एक दिन उसने लालच में आकर पेड़ को नुकसान पहुंचाया। तभी उसे अपनी गलती समझ आ गई। वह पेड़ से माफी मांगने लगा। उसने रोज़ पेड़ों को पानी देना शुरू किया। कुछ दिनों बाद पेड़ फिर से हरा-भरा हो गया। आदमी बहुत खुश हुआ।
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पेड़ की सीख
आरोही गुप्ता, उम्र- 13 वर्ष
एक हरे-भरे गांव में एक बहुत पुराना और घना पेड़ था। वह सबको छाया देता था पक्षियों का घर था और राहगीरों को ठंडक देता था। उसी गांव में एक लकड़हारा रहता था। एक दिन वह कुल्हाड़ी लेकर उस पेड़ को काटने आ गया। पेड़ ने डरते हुए पूछा “भैया, मुझे क्यों काट रहे हो? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?” लकड़हारे ने कहा, “मुझे लकड़ी चाहिए। मेरा घर इसी से चलेगा।” पेड़ कुछ देर चुप रहा, फिर बोला,“अगर तुम मुझे पूरा काट दोगे तो छाया, फल और हवा सब खत्म हो जाएगी। पर मैं तुम्हारी मदद जरूर करना चाहता हूं।” पेड़ ने अपनी एक मोटी टहनी आगे बढ़ाई और कहा, “इसे काट लो, इससे तुम्हारा काम भी हो जाएगा और मैं भी ज़िंदा रहूंगा।” लकड़हारा शर्मिंदा हो गया। उसे समझ आ गया कि वह लालच में आकर प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहा था। उसने कुल्हाड़ी नीचे रख दी और कहा, “तुम सच में बहुत दयालु हो। अब मैं कभी किसी पेड़ को बेवजह नहीं काटूंगा।” उस दिन के बाद लकड़हारा गाँव वालों को पेड़ों की महत्ता समझाने लगा। पेड़ मुस्कराया और उसकी पत्तियाँ हवा में लहराने लगीं।
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लालच बुरी बला
रुद्र प्रताप उम्र- 8 वर्ष
किसान के बगीचे में एक बड़ा घना फलदार पेड़ था। किसान रोज एक लौटा पानी पेड़ की जड़ में डालता था और पेड़ एक फल गिरा देता था। दोनों में अच्छा सामंजस्य, मित्रता थी मानो वे एक-दूसरे की बात सुनते और समझते हो। एक दिन किसान ने लालचतापूर्वक सोचा कि प्रतिदिन एक लौटा पानी डालने से एक फल मिलता है अगर मैं खूब सारा पानी पेड़ की जड़ में डालूं तो मुझे एक दिन में बहुत सारे फल मिलेगे जिनको मैं बाजार में बेच कर बहुत सारा धन कमा सकता हूं और धीरे-धीरे अमीर बन सकता हूं। अगले दिन किसान ने बहुत सारा पानी पेड़ की जड़ में डाल दिया। एक साथ ज्यादा पानी से कीचड़ हो गया। पेड़ की जड़े गलने लगी, पत्तियां और फूल मुरझाने लगे और फल आना बंद हो गए। ये देखकर किसान बहुत दुखी हुआ। उसने एक अच्छा मित्र खो दिया। उसे शिक्षा मिली कि लालच करना बुरी बात होती है जो मिला है उसी में संतोष करना चाहिए।
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इसमें तो बिल्कुल स्वाद ही नहीं है
प्रद्युमन सिंह राजावत, उम्र- 10 वर्ष
एक बगीचे में एक पेड़ था, जिसमें बहुत सारे फल आते थे। लेकिन वह पेड़ हमेशा उदास रहता था। एक आदमी रोज़ आकर उसके फल तोड़ ले जाता और खा जाता, पर बोलता, “अरे यार, इसमें तो बिल्कुल स्वाद ही नहीं है!” एक दिन वह आदमी पेड़ से बोला, “तुम इतने फीके-फीके और गंदे फल क्यों देते हो? न मिठास, न स्वाद!” पेड़ को गुस्सा भी आया और थोड़ा दुख भी हुआ। उसने कहा, “मैं तो ऐसे ही फल देता हूं, खाना है तो खाओ, नहीं तो मत खाओ! फिर आदमी ने सोचा, “चलो, इसे पांच दिन पानी और खाद देता हूं। पांच दिन बाद जब उसने फल खाया, तो बोला, “अरे वाह! कितना मीठा फल है!” और खुशी में उछलने लगा। पेड़ हैरान होकर सोचने लगा, “मैं तो हमेशा खुद को बेकार समझता था। फिर अचानक ऐसा कैसे हो गया?” तभी उसे समझ आया कि कमी उसमें नहीं थी, बस उसे थोड़ा पानी और खाद चाहिए था। इसके बाद पेड़ को खुद पर भरोसा हो गया। वह और भी मीठे-मीठे फल देने लगा, खुश रहने लगा और सबको अच्छे-अच्छे फल देने लगा।
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दयालु लकड़हारा
रिशिता टहलयानी, उम्र-10 वर्ष
गंगापुर नाम का एक गांव था। वहां पर एक विशाल पेड़ था उसके बहुत ही अनोखे और मीठे फल थे।परंतु वहां के लोग जब भी गुस्सा होते तो वह उसे पेड़ को भला बुरा कहते और यह उस पेड़ को अच्छा नहीं लगता और वह अपने मीठे फल नहीं देता।एक दिन वह पेड़ उदास होकर मरने ही वाला था कि तभी वहां से श्याम नामक एक लकड़हारा जा रहा था।तभी वह पेड़ लकड़हारा को बोला कि मुझे काट डालो यहां के लोग मुझे भला बुरा कहते हैं और यह मैं सह नहीं सकता। यह सुनकर उस लकड़हारे को पेड़ पर दया आ गई और उसे पानी डालने लगा और पेड़ खुश हो गया उसने शाम को एक फल दिया और कहने लगा कि तुम ही इस गांव में एक ऐसे इंसान हो जिसने मेरी मदद की और फिर पेड़ फिर से खुश रहने लगा।
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वृक्ष की खुशी और माली का लालच
दित्या लढ़ा, उम्र- 8 वर्ष
एक समय की बात है एक बगीचे में एक नन्हा सा पौधा लगा था। एक दयालु माली रोज़ाना उस पौधे की देखभाल करता और उसे समय पर पानी देता था। माली के प्यार और सींचने के कारण मात्र दो वर्षों में वह छोटा सा पौधा एक विशाल और छायादार वृक्ष बन गया। एक दिन उस पेड़ ने माली से बात की और कहा, "हे मित्र! तुम बहुत अच्छे इंसान हो। जब दूसरे लोगों ने मेरे साथी पेड़ों को काट दिया तब तुमने मेरी रक्षा की। आज मैं इस विशाल बगीचे में अकेला हूं, पर तुम्हारी वजह से सुरक्षित हूं। तुम्हारी इस निस्वार्थ सेवा के बदले में, मैं चाहता हूं कि तुम मेरे मीठे फल जब चाहे ले सकते हो।" पेड़ अपने माली की मदद करके बहुत खुश था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता माली के मन में लालच घर कर गया। उसने सोचा, "अगर मैं रोज थोड़े-थोड़े फल लेने के बजाय एक ही बार में सारे फल तोड़ लूं, तो मैं बहुत अमीर बन जाऊंगा।" उसने ऐसा ही किया। उसने पेड़ को नुकसान पहुंचाकर सारे फल एक साथ तोड़ लिए और उन्हें बाज़ार में बेच दिया। लालच का फल कभी मीठा नहीं होता। ज़्यादा मुनाफ़े के चक्कर में उसने पेड़ का साथ खो दिया और धीरे-धीरे उसका व्यापार ठप हो गया। वह आदमी फिर से गरीब हो गया। अपनी गलती पर पछताते हुए वह वापस पेड़ के पास गया और रोते हुए बोला, "हे मित्र! मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है। लालच ने मेरी बुद्धि भ्रष्ट कर दी थी, जिससे मैंने तुम्हारा भरोसा तोड़ा और अपना सब कुछ खो दिया।"
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भोले बच्चे और समझदार पेड़
आराध्या, उम्र-10 वर्ष
एक जंगल में टिंकू और मिंकू खेल रहे थे। उन्हें एक सुंदर पेड़ दिखाई दिया जिसे उन्होंने काटने का सोचा। जब वे कुल्हाड़ी चलाने लगे तो पेड़ ने दर्द से चिल्लाते हुए कहा कि वह उन्हें छाया, ऑक्सीजन और पक्षियों को घर देता है। पेड़ की बात सुनकर बच्चों को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत माफी मांगी और कुल्हाड़ी फेंक दी और पेड़ की देखभाल करने का वादा किया। इस दिन से वे हर रोज पेड़ के पास आते और उसकी सेवा करते।
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