
सहायता का सबक
नाव्या श्रीवास्तव, उम्र-10 वर्ष
हमारे गांव में तीन दिनों से लगातार पानी बरसता रहा। सभी पोखर तालाब पानी से भर गए। बरसात बंद होने पर आज मैं भी अपने बड़े भाई नमन के साथ नमक लाने बाजार जाने के लिए निकली। हमारे घर से बाजार जाने के बीच एक छोटा नाला पड़ता था जिसे पार करके ही हम बाजार पहुंचते थे। आज भी नाले में पानी तेज बह रहा था। यह देखकर हम नाले के पास रुक गए। अचानक मैंने देखा एक बिल्ली चूहे को पकड़ने के लिए पानी में कूद गई। पानी के तेज बहाव के कारण चूहा और बिल्ली दोनों पानी की धार में बहने लगे और देखते ही देखते तालाब में डूबने लगे। यह देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। मैंने भैया से बिल्ली को बचाने के लिए कहा लेकिन पानी गहरा होने के कारण भैया तालाब में नहीं उतर सका। इसी समय एक कुत्ता दौड़ता हुआ आया और तालाब में कूद कर डूबते हुए चूहा बिल्ली के पास पहुंच गया। कठिन स्थिति देखकर बिल्ली और चूहा दुबककर कुत्ते की पीठ पर बैठ गए। धीरे-धीरे कुत्ता तैरता हुआ उन्हें पानी से बाहर निकाल लाया। बाहर निकलते ही बिल्ली और चूहा तेजी से दौड़कर अपनी जान बचाकर भाग गए। यह देखकर हमें बहुत खुशी हुई। मुझे एहसास हुआ कि देखो आपस में लड़ने वाले पशु भी कठिन परिस्थितियों में एक दूसरे का कितना साथ देते हैं। उस दिन मैंने सीखा हमें भी कठिन परिस्थितियों में एक दूसरे का साथ देना चाहिए।
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यारों की दोस्ती
कृति, उम्र-10 वर्ष
एक जंगल में टिंकू चूहा रहता था। वह खाने की खोज में नदी किनारे पहुंच गया। वह पेड़ पर चढ़ गया। अचानक उसका पैर फिसल गया और वह नदी में गिर गया। पेड़ के पीछे कूकू बिल्ली बैठी थी। अचानक उसकी नजर टिंकू चूहे पर गई, जो नदी में गिर गया था। कुकू बिल्ली टिंकू चूहे को बचाने के लिए नदी में कूद गई, परंतु कुकू बिल्ली को तैरना नहीं आता था। टॉमी कुत्ता घास में खेल रहा था। उसने देखा कि कुकू बिल्ली और टिंकू चूहा नदी में डूब रहे हैं। टॉमी अपनी जान पर खेलकर टिंकू और कुकू को बचाने के लिए नदी में कूद गया। उसने टिंकू चूहा और कुकू बिल्ली को अपनी पीठ पर बिठाया और तैरते हुए किनारे पर पहुंच गए। कुकू बिल्ली और टिंकू चूहे ने टॉमी कुत्ते को बहुत धन्यवाद दिया। तब से वे तीनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए।।
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चेरियां खाकर उनका आनंद लिया
कनक अग्रवाल, उम्र- 10 साल
एक बार की बात है एक जंगल में चेरी का पेड़ था। पेड़ के उस पार एक नदी थी। जंगल में चूहा बिल्ली और कुत्ता था। उन तीनों की बहुत गहरी मित्रता थी। चूहे का नाम टॉमी बिल्ली का नाम कीटो था। कुत्ते का नाम क्रंची था। एक बार वह सभी जंगल में नदी के किनारे खेल रहे थे। तभी उन्हें भूख लगी तो क्रांति ने कहा नदी के उस पार चेरी का पेड़ है चलो हम सभी चेरी खाने नदी के लिए उस पार चलते हैं। तभी कीटों ने कहा पर चरी का पेड़ तो नदी के उस पार है और मुझे तो तैरना भी नहीं आता तभी टॉमी ने कहा मुझे भी तैरना नहीं आता। तभी क्रंची ने कहा कि मैं तुम्हें अपनी पीठ पर बैठाकर नदी के उस पार लेकर चलता हूं। तभी क्रंची ने टॉमी और कीटों को अपनी पीठ पर बैठाता है और वह तीनों नदी पार करना शुरू करते हैं। उसके बाद सभी मित्रों ने नदी पार कर ली और पेड़ के पास पहुंच गए और जब वह तीनों मित्र पेड़ के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि पेड़ के पास में सुंदर-सुंदर फूल खिले हुए थे। तभी क्रांति ने कहा टॉमी और कीटो चलो अब तुम दोनों मेरी पीठ से उतर जाओ हम पेड़ के पास पहुंच चुके हैं तभी कीटो और टॉमी क्रंची की पीठ पर से उतर गए और तीनों मित्रों ने मिलकर पेड़ से गिरी हुई चेरियां खाकर उनका आनंद लिया।
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सच्ची दोस्ती
कुमकुम परमार, उम्र- 12 वर्ष
एक पेड़ में चूहे का छोटा सा बिल था वह पेड़ सेब का था और नदी किनारे भी था वहां पर एक बिल्ली रोज आया करती थी जब जब हवा चलती वह सारे सेब नीचे गिर जाते और जो बिल्ली थी वह उनको खाने लग जाती एक दिन बिल्ली सेब खाते खाते नदी के किनारे जा पहुंची और नदी में गिर गई। वहां पर एक कालू नाम का कुत्ता भी रहता था उसने देख लिया और वो नदी में बिल्ली को खाने जा पहुंचा। लेकिन जो चूहा था वह बिल्कुल भी बिल्लियों से नहीं डरता था जब-जब वह वहां से निकलता वह बिल्ली उसको हमेशा दिखती और बिल्ली और चूहा दोस्त बन गए थे तभी उसने देखा कि आज बिल्ली कहां गई वह आई क्यों नहीं फिर थोड़ी देर बाद उसने आगे जाकर देखा तो वह देखता है की नदी में बिल्ली गिरी हुई है और उसको कालु खाने की कोशिश कर रहा है। चूहे ने कालु से कहा कृपया मेरी दोस्त बिल्ली को छोड़ दो चाहो तो मुझे खालो। चूहे की ये बात सुनकर उनकी इतनी अच्छी दोस्ती देखकर कालु का मन पिघल गया और उसने उन दोनों को अपनी पीठ पर बिठाकर नदी से बाहर निकाला और फिर वो तीनो बहुत अच्छे दोस्त बन गए और मिलकर पेड़ से मीठे मीठे सेब खाने लगे।
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दोस्ती
जाह्नवी, उम्र- 11 वर्ष
एक जंगल में एक चूहा रहता था। एक दिन वह खाना ढूंढते ढूंढते नदी के किनारे आ गया। अचानक वह नदी में गिर गया। और वह कई देर तक मदद के लिए पुकार। परंतु किसी ने नहीं सुना। तभी उसकी दोस्त पूसी बिल्ली आई और उसने देखा मेरा दोस्त डूबने वाला है। परंतु पूसी बिल्ली को तो तैरना ही नहीं आता था। उसने बार-बार कोशिश कारी पर वह बार-बार डूबने लगती। फिर इस बिल्ली अपने दोस्त टिंकू कुत्ते को बुलाकर लाई। टिंकू ने चूहे और बिल्ली को बचा लिया। उसने उन दोनों को अपनी पीठ पर बिठाकर बाहर निकाल लिया। चूहे ने उन दोनों को मदद करने के लिए धन्यवाद कहा।
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असहाय की सहायता
हार्दिक शर्मा, उम्र-10 वर्ष
इस कविता में एक कुत्ता एक बिल्ली और एक चूहा है कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें मददगार बनना चाहिए और असहाय की सहायता करना चाहिए इसमें एक चूहा जो नदी में डूब गया था। तो उसमें एक बिल्ली और एक कुत्ते ने योजना बनाकर उसे बाहर निकालने के बारे में सोचा जिसमें कुत्ते ने अपनी पीठ पर बिल्ली को बिठाया और फिर चूहे को बिठाकर उसे नदी से बाहर निकाला। इस तरह उसे चूहे की जान बचाई कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी जरूरतमंद की मदद करनी चाहिए वह अपने संस्कारों को प्रदर्शित करना चाहिए।
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मन की सोच
भुविक दाधिच, उम्र-7 वर्ष
हरि काका के बगीचे में कई तरह के पेड़ थे। जो समय-समय पर फल फ़ूलों से भरे रहते थे। हरि काका उनकी बहुत देखभाल करते थे। फल वाले पेड़ों की विशेष देखरेख करते। खाद पानी देते और पैदावार को बाजार में ले जाते। बगीचे में एक पेड़ जो काफी पुराना था। उस पर फल भी कम आने लगे थे। उस पर हरि काका कम ध्यान देने लगा था। एक दिन वह बगीचे में टहलता हुआ उस पेड़ के पास से गुजरा तो उसे लगा कि यह पेड़ जैसे उसे कुछ कह रहा है। क्यों काका मैं पुराना बूढ़ा होने लगा हूं तो तुम खाद पानी भी नहीं देते हो। पहले जब फल देता था, तब तो बहुत ध्यान रखते थे। आप भी हमेशा ऐसे नहीं रहोगे। कुछ समय बाद बूढे़ होने पर आपके बच्चे भी आपका ध्यान नही रखेंगे तो आपको कैसा लगेगाय। हरि काका आत्मग्लानि से भर गया। सोचने लगा क्या पुराने होने पर उनकी देखभाल नहीं होनी चाहिए। वह जैसे क्षमा मांगता सा तुरंत उस पेड़ के आस-पास के झाड़ साफ कर पानी से भारा घड़ा ले आया और खुशी मन से उस पेड़ को पानी देने लगा।
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सच्ची खुशी
एकांशा कंवर, उम्र-11वर्ष
एक दिन, चेतक, म्याऊं और मूषक को एक जादुई पेड़ मिला। जिसकी पत्तियां अनोखे रंगों की थीं। पेड़ ने उनकी निस्वार्थ दोस्ती देखकर उन्हें एक इच्छा मांगने का मौका दिया। उन्होंने अपने लिए कुछ मांगने के बजाय जंगल की शांति और खुशहाली की कामना की। उनकी महान इच्छा तुरंत पूरी हो गई। जंगल के जानवर लड़ने के बजाय एक-दूसरे की मदद करने लगे। इस घटना से उन्होंने सीखा कि सच्ची खुशी दूसरों की भलाई में है और दयालुता व दोस्ती दुनिया का सबसे बड़ा जादू है, जो इसे बेहतर बना सकता है।
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सच्ची दोस्ती
देवीशी बंसल, उम्र- 9वर्ष
कुत्ता, बिल्ली और चूहा सच्चे और पक्के मित्र थे। वह आपस में मिल-जुल कर रहते थे। एक दिन उन्हें बहुत भूख लग रही थी। उन्होंने नदी के उसे पार एक सेब का पेड़ देखा। लेकिन चूहा और बिल्ली को तैरना नहीं आता था। कुत्ते को तैरना आता था। इसलिए कुत्ते ने उन दोनों को अपनी पीठ पर बैठा कर नदी पार करा दी।बिल्ली ने पेड़ पर चढ़कर सेब नीचे गिरा दिए। फिर तीनों ने मिलकर मजे से सेब खा लिए।
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एक बिल्ली
मनीष जांगिड़, उम्र - 11वर्ष
एक वन में उम्र। उसी वन मे एक बिल्ली भी अपने चार नवजात बच्चों के साथ रहती थी। मोती एक दिन संध्या की वेला में नदी किनारे खेल रहा था। उसकी नजर बिल्ली पर पड़ी जो कि तेज बहाव के कारण पानी में डूबने वाली थी। वह अपने बच्चों के भोजन के लिए चूहें का शिकार मुंह में दबा के नदी के उस पार से आ रही थी। मोती को उस पर दया आ गयी। उसने तुरंत नदी में छलांग लगा दी और बिल्ली भी लपक करके मोती की पीठ पर बैठ गयी। मोती ने उसे नदी किनारे तैर कर ले आया। बिल्ली भी मन ही मन धन्यवाद करती हुई अपने घर चली गयी ।
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सच्ची मित्रता की ताक़त
हनाया देवरा, उम्र- 7 वर्ष
एक जंगल में एक कुत्ता, एक बिल्ली और एक चूहा अच्छे मित्र थे। वे हमेशा साथ खेलते और एक-दूसरे का ध्यान रखते थे। एक दिन चूहा नदी के पास खेलते-खेलते पानी में गिर गया। वह डर गया और जोर से चिल्लाने लगा। उसकी आवाज सुनकर कुत्ता तुरंत नदी में कूद पड़ा। बिल्ली भी कुत्ते की पीठ पर बैठ गई और चूहे को पकड़ लिया। कुत्ता तैरकर तीनों को सुरक्षित किनारे ले आया। पास ही फलदार पेड़ था। तीनों ने मिलकर फल खाए और खुश हुए।
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अपनत्व और दोस्ती की मिसाल
देवर्ष खत्री, उम्र- 8 वर्ष
एक दिन एक छोटा चूहा नदी के किनारे खेल रहा था। अचानक वह नदी में गिर गया और डूबने लगा। तभी बाहर खड़ी एक बिल्ली ने पहले उसे खाने का सोचा,लेकिन फिर उसके मन में चूहे के प्रति दया का भाव आया और वह उसकी मदद करने के लिए पानी में कूद गई। बिल्ली ने चूहे को बचाने की कोशिश की, लेकिन वह खुद भी डूबने लगी। उसी समय एक कुत्ता नदी के पास से गुजर रहा था। उसने देखा कि बिल्ली और चूहा दोनों डूब रहे हैं। कुत्ते ने भी पहले बिल्ली की तरह दोनों को खाने का सोचा लेकिन फिर उसके मन में भी दोनों के प्रति दया का भाव आया और वह तुरंत नदी में कूद गया और दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लाया। बिल्ली ने चूहे को अपने मुंह में पकड़ लिया और कुत्ते की पीठ पर बैठ गई। तीनों ने नदी के किनारे खड़े होकर राहत की सांस ली। पास ही एक हरा भरा पेड़ था, जिस पर लाल फल लगे हुए थे। कुत्ते ने कहा, "चलो, हम उस पेड़ के नीचे आराम करेंगे और फल खाएंगे।" बिल्ली ने कहा, "लेकिन मैं तो चूहे को खाना चाहती थी!" चूहे ने डरते हुए कहा, "अब क्या होगा?" तभी कुत्ते ने भी कहा की मैं भी तुम दोनों को खाना चाहता था,इस पर बिल्ली ने कुत्ते की तरफ डरते हुए देखा तभी कुत्ते ने हंसकर कहा, "अरे अब तो हम तीनों दोस्त हैं! चलो, हम तीनों मिलकर फलों का आनंद लेते हैं। तीनों दोस्त पेड़ के नीचे बैठ गए और फलों का आनंद लेने लगे। उन्होंने एक दूसरे की मदद करने और दोस्ती के महत्व को समझा। वे तीनों हमेशा के लिए अच्छे दोस्त बन गए और साथ में खुशी से रहने लगे।
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दोस्ती की उड़ान
रोहित, उम्र- 13 वर्ष
एक हरे-भरे जंगल में एक बिल्ली और एक कुत्ता रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे और हमेशा साथ खेलते थे। एक दिन वे पेड़ के नीचे बैठे हुए आसमान को देख रहे थे। बादल बहुत सुंदर लग रहे थे। तभी बिल्ली ने कहा,“काश हम भी उड़ पाते और ऊपर से पूरी दुनिया देख पाते। कुत्ता बोला,“अगर कोशिश करें तो शायद उड़ सकें।” दोनों एक छोटी पहाड़ी पर चढ़ गए। वहां तेज़ हवा चल रही थी। पास ही एक बड़ा पत्ता पड़ा था। उन्होंने उसे पंख की तरह पकड़ लिया और कूद पड़े।
लेकिन उड़ने की जगह वे सीधा नीचे गिर गए। नीचे एक सेब का पेड़ था। टकराने से कई सेब ज़मीन पर गिर गए। बिल्ली और कुत्ते को थोड़ी चोट लगी, पर वे ज़्यादा दुखी नहीं हुए। बिल्ली ने हंसते हुए कहा,“लगता है उड़ना हमारे बस की बात नहीं है।” कुत्ता बोला,“हां, पर गिरने के बाद भी हम साथ हैं, यही सबसे अच्छी बात है।”दोनों ज़मीन पर पड़े सेब उठाने लगे। फिर पेड़ की छांव में बैठकर सेब खाए और आराम करने लगे। कुछ देर बाद वे फिर से खेलने लगे जैसे कुछ हुआ ही न हो। उस दिन उन्हें समझ आया कि हर सपना पूरा होना ज़रूरी नहीं, लेकिन दोस्ती हमेशा साथ देती है। मुश्किल समय में अगर कोई साथ हो, तो दर्द भी कम लगता है।
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मोनू और टोनी की दोस्ती
अयमान सनोवर, उम्र- 7 वर्ष
एक जंगल में एक बिल्ली का बच्चा रहता था, जिसका नाम था मोनू। एक दिन, मोनू पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था, तभी वह नदी में गिर गया। नदी का पानी बहुत तेज था और मोनू डूबने लगा। तभी वहां से एक कुत्ते का बच्चा गुजर रहा था, जिसका नाम था टोनी। उसने जब मोनू को डूबते हुए देखा, तो उसने अपनी जान की परवाह नहीं की और उसे बचाने के लिए नदी में कूद गया। टोनी ने मोनू को अपनी पीठ पर बिठाया और उसे जमीन पर वापस लेकर आ गया। मोनू बहुत खुश हुआ और टोनी को धन्यवाद दिया। उसके बाद से दोनों अच्छे दोस्त बन गए और मिलजुल कर खेलने लगे। वे साथ में खेलते, खाते और सोते थे। उनकी दोस्ती देखकर सभी जानवर खुश होते थे।
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Updated on:
21 Jan 2026 05:23 pm
Published on:
21 Jan 2026 05:22 pm
