5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नरसिंहपुर जिले में जंगल से आबादी तरफ बढ़ते वन्यजीव बढ़ा रहे अनहोनी का खतरा

The threat from wild animals in the district (प्रकाश चौबे) नरसिंहपुर. जिले में जंगली जानवरों का खतरा हर साल दायरा बढ़ा रहा है। अब केवल गांवों और आबादी क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि जंगलों के भीतर भी पशु चराने और आजीविका से जुड़े ग्रामीण लगातार नुकसान बढ़ रहा हैं। वन विभाग के पिछले पांच वर्षों […]

3 min read
Google source verification
जिले में जंगली जानवरों का खतरा हर साल दायरा बढ़ा रहा है। अब केवल गांवों और आबादी क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि जंगलों के भीतर भी पशु चराने और आजीविका से जुड़े ग्रामीण लगातार नुकसान बढ़ रहा हैं।

जिले का सघन वनक्षेत्र जहां वन्यजीवों की संख्या अधिक है।

The threat from wild animals in the district (प्रकाश चौबे) नरसिंहपुर. जिले में जंगली जानवरों का खतरा हर साल दायरा बढ़ा रहा है। अब केवल गांवों और आबादी क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि जंगलों के भीतर भी पशु चराने और आजीविका से जुड़े ग्रामीण लगातार नुकसान बढ़ रहा हैं। वन विभाग के पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि मानव-वन्यजीव संघर्ष अब दोहरी चुनौती बन चुका है। पहले यह खतरा गर्मी के मौसम में ही अधिक रहता था, जब वन्यजीव आबादी तरफ आते थे लेकिन अब इस खतरे का कोई मौसम तय नहीं है। खासकर उन इलाकों में जो जंगलों से लगे हैं या जंगलों के बीचबीच है। जिले में बीते पांच वर्षों में भालू, जंगली सूअर और सियार के हमलों से 145 लोग घायल हुए। अन्य वन्य प्राणियों से 4 लोग घायल हुए, जबकि इसी अवधि में 2 जनहानि के मामले सामने आए। यह घटनाएं ज्यादातर गांवों के आसपास खेतों और जंगल से सटे इलाकों में दर्ज की गईं, जहां ग्रामीणों की आवाजाही और आजीविका सीधे जंगल पर निर्भर है।
जंगलों में पशुधन भी सुरक्षित नहीं
पशुहानि के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। पांच वर्षों में बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्य प्राणियों के हमलों में 118 पशु मारे गए। इनमें तेंदुआ से जुड़े मामले सबसे अधिक रहे। जंगलों के भीतर चराई के दौरान और रात के समय गांवों के आसपास पशुओं पर हमले लगातार दर्ज होते रहे।
पांच साल में 269 घटनाएं
वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक जिले में कुल 269 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें भालू, जंगली सूअर और सियार के हमलों से लोग घायल हुए, तेंदुआ और बाघ के हमलों में पशु मारे गए और कुछ मामलों में जनहानि भी हुई। इन घटनाओं के बदले शासन को 55 लाख 17 हजार 922 रुपये से अधिक का मुआवजा देना पड़ा।
मुआवजा बढ़ा, लेकिन घटनाएं भी जारी
वर्ष 2021-22 में जहां 40 घटनाओं पर करीब 14.27 लाख रुपए मुआवजा दिया गया, वहीं 2022-23 और 2023-24 में घटनाओं की संख्या 70 के पार पहुंच गई। 2024-25 में जनहानि का मामला सामने आने से मुआवजा राशि 15.11 लाख रुपए तक पहुंच गई। चालू वर्ष 2025-26 में भी अब तक 32 घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं।
आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि जिले में जंगली जानवरों का खतरा आबादी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। जंगलों के भीतर भी पशुपालन और वनोपज पर निर्भर ग्रामीण लगातार नुकसान झेल रहे हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएं इस बात की चेतावनी हैं कि यदि प्रभावी रोकथाम और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
बढ़ती घटनाओं की यह हैं प्रमुख बड़ी वजह
जंगल में लोगों की अधिक आवाजाही
जनसामान्य में सुरक्षा के प्रति लापरवाही
जंगल क्षेत्र तक आबादी का बढऩा
जंगल से लगकर खेतीहर क्षेत्र बढऩा

वर्षवार जिले में घटित घटनाएं-मुआवजा
वर्ष 2021-22-
भालू, जंगली सूअर, सियार से घायल- 25
ुुमुआवजा राशि- 917324 रुपए
अन्य वन्य प्राणियों से जनहानि- 01
मुआवजा राशि-4 लाख रुपए
अन्य वन्य प्राणियों से घायल-01
मुआवजा-5779 रुपए
तेंदुआ से पशुहानि- 07
मुआवजा राशि-71000
अन्य वन्य प्राणियों से पशुहानि- 06
मुआवजा-33000
वर्ष 2022-23-
भालू, जंगली सूअर, सियार से घायल-43
मुआवजा राशि- 522348
जनहानि- 0
अन्य वन्य प्राणियों से घायल-01
मुआवजा-1000
बाघ से पशुहानि-06
मुआवजा-60 हजार
तेंदुआ से पशुहानि-17
मुआवजा-183000
अन्य वन्य प्राणियों से पशुहानि-07

मुआवजा- 126500

वर्ष 2023-24-
भालू, जंगली सूअर, सियार से घायल-43
मुआवजा-800137
अन्य वन्य प्राणियों से जनहानि-0
अन्य वन्य प्राणियों से जनघायल-01
मुआवजा-12823
बाघ से पशुहानि-04
मुआवजा-32000
तेंदुआ से पशुहानि-19
मुआवजा-279500
अन्य वन्य प्राणियों से पशुहानि-04
मुआवजा-57000
वर्ष 2024-25-
भालू, जंगली सूअर, सियार से घायल-19
मुआवजा-207545
अन्य वन्यप्राणियों से जनहानि-01
मुआवजा-8 लाख
अन्य वन्य प्राणियों से जनघायल-01
मुआवजा-6932
बाघ से पशुहानि-01
मुआवजा-62000
तेंदुआ से पशुहानि-19
मुआवजा-222500
अन्य वन्य प्राणियों से पशुहानि-11
मुआवजा-213000
वर्ष 2025-26-
भालू, जंगली सूअर, सियार से घायल-15
मुआवजा-127534
अन्य वन्य प्राणियों से जनहानि-0
अन्य वन्य प्राणियों से जनघायल-0
बाघ से पशुहानि-02
मुआवजा-50000
तेंदुआ से पशुहानि-10
मुआवजा-191000
अन्य वन्यप्राणियों से पशुहानि-05
मुआवजा-136000
वर्जन
वन्यजीवों से लोगों को नुकसान न हो इसके लिए मुनादी तो कराते ही हैं, लोगों को जागरूक भी करते हैं। जगह-जगह सुरक्षा प्रबंध भी करते हैं। वैसे हमारे जिले में घटनाएं कम ही होती हैं। जो मामले आते हैं उनमें नियमानुसार राहत दी जाती है।
कल्पना तिवारी, डीएफओ नरसिंहपुर
एक्सपर्ट व्यू
पशुओं का शिकार करना वन्यजीवों की स्वाभाविक प्रकृति है। घटनाओं में बढ़ोतरी का मुख्य कारण वन क्षेत्र, कृषि भूमि और आबादी क्षेत्रों के बीच की दूरी का लगातार कम होना है।
रजनीश कुमार सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ, रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व

-