
भारत-अरब समझौता। ( फोटो: ANI)
New Delhi Declaration: भारत और अरब देशों के बीच सदियों पुराने रिश्तों (India-Arab Relations) को एक नई रणनीतिक ऊंचाई देने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में बैठकों का महत्वपूर्ण दौर चला। इस दौरान दोनों पक्षों ने न केवल पुराने समझौतों की समीक्षा की, बल्कि भविष्य के लिए एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया। भारत और अरब लीग (Arab League Summit) ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए आपसी व्यापार को वर्तमान 240 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ा कर साल 2030 (Trade Target 2030) तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर (दोगुना) तक ले जाने का फैसला किया है।
इस बड़ी घोषणा से पहले, 'भारत-अरब सहयोग मंच' की चौथी वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (SOM) आयोजित की गई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) नीना मल्होत्रा और अरब लीग में यूएई के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हमद ओबैद इब्राहीम सलेम अल-ज़ाबी ने की। अधिकारियों ने बैठक में उन नए क्षेत्रों की पहचान की, जिन्हें बाद में विदेश मंत्रियों के सामने मंजूरी के लिए रखा गया। इसमें पुरानी परियोजनाओं की रफ्तार और नई संभावनाओं पर गहन मंथन हुआ।
दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अरब जगत के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। बैठक के बाद जारी 'नई दिल्ली घोषणा' (New Delhi Declaration) में दोनों पक्षों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर मुहर लगाई। इसके साथ ही, यह मांग भी की गई कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आज की वैश्विक हकीकत के अनुसार तत्काल सुधार किए जाएं।
अब केवल तेल और व्यापार तक सीमित नहीं रहा। डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बताया कि अब फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल गवर्नेंस, स्किल डवलपमेंट और इनोवेशन (नवाचार) पर रहेगा। दोनों पक्षों ने 2026 से 2028 के लिए एक कार्यकारी कार्यक्रम (Executive Program) भी अपनाया है, जो इन योजनाओं को जमीन पर उतारने में मदद करेगा। विदेश मंत्री ने कहा कि यह साझेदारी दोनों सभ्यताओं के ऐतिहासिक संबंधों को आधुनिक दौर में और मजबूत करेगी।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक मध्य-पूर्व (Middle East) में भारत की बढ़ती धमक का प्रमाण है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापार को दुगुना करने का लक्ष्य यह दर्शाता है कि अरब देश अब तेल आधारित अर्थव्यवस्था से बाहर निकल कर टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग में भारत को एक बड़ा साझीदार मान रहे हैं। वहीं, आतंकवाद के मुद्दे पर अरब लीग का भारत के सुर में सुर मिलाना और वैश्विक मंच पर पाकिस्तान जैसे देशों के लिए एक कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
इस सम्मेलन में मंजूर किए गए 'कार्यकारी कार्यक्रम 2026-28' के तहत अब मंत्रालयों के स्तर पर काम शुरू होगा। आने वाले महीनों में डिजिटल गवर्नेंस और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के लिए संयुक्त वर्किंग ग्रुप्स (Joint Working Groups) का गठन किया जा सकता है। इसके अलावा, 500 अरब डॉलर का व्यापारिक लक्ष्य हासिल करने के लिए दोनों तरफ से व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों (Business Delegations) के दौरों में तेजी आने की उम्मीद है।
इस बैठक का एक अहम लेकिन भावुक पहलू 'कल्चरल डिप्लोमेसी' रहा। विदेश मंत्री ने ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। अरब देशों में रहने वाले लाखों भारतीय (NRIs) इस रिश्ते की सबसे मजबूत कड़ी हैं। डिजिटल गवर्नेंस और स्किल डवलपमेंट में सहयोग बढ़ने से वहां काम करने वाले भारतीय कामगारों और पेशेवरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे 'पीपल-टू-पीपल' कनेक्ट और गहरा होगा। ( ANI)
Updated on:
01 Feb 2026 04:50 pm
Published on:
01 Feb 2026 04:49 pm
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