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लेज़र तकनीक से होगी जिला अस्पताल में अब आंखों की सर्जरी, जानें मामला

जिला अस्पताल में लेजर विधि से आंखों के ऑपरेशन की सुविधा जल्द शुरू होने वाली है। अब मरीजों को आंखों के ऑपरेशन कराने के लिए मजबूरन निजी अस्पताल में जाने की जरुरत नहीं होगी।

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बरेली। जिला अस्पताल में लेजर विधि से आंखों के ऑपरेशन की सुविधा जल्द शुरू होने वाली है। अब मरीजों को आंखों के ऑपरेशन कराने के लिए मजबूरन निजी अस्पताल में जाने की जरुरत नहीं होगी। अस्पताल प्रशासन ने लेजर मशीन मंगाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। मंजूरी के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

कितने होते हैं हर वर्ष जिला अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन, जानें
आंकड़ों के अनुसार जिला अस्पताल में हर वर्ष 20 हजार से अधिक आंखों के ऑपरेशन होते हैं जिनमें 90 प्रतिशत ऑपरेशन मोतियाबिंद के शामिल हैं। लेजर मशीन के आने से ऑपरेशन का ग्राफ और बढ़ जाएगा।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. डीएन सिंह ने बताया कि फेको आंखों के मोतियाबिंद इलाज के लिए आधुनिक तकनीक है। इस विधि के दौरान आंख में 2.8 मिमी का बारीक छेदकर सफेद मोतिया को आंखों के अंदर ही घोल दिया जाता है और फोल्डेबल लैंस को आंख के अंदर प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।

आधुनिक विधि से आंखों के ऑपरेशन होने से मरीजों को मिलेगी सहूलियत
मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद लेंस और आंख की पुतली के बीच जाले आने से मरीज को देखने में परेशानी होती है। आंखों के धुंधलेपन को हटाने के लिए लेजर मशीन का प्रयोग किया जाता है। नई तकनीक से पांच मिनट में ही आंख के जाले निकल जाते हैं। अभी अस्पताल में अत्याधुनिक तकनीक से आंखों के ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। वहीं, डॉ. अलका शर्मा, एडीएसआईसी ने बताया कि लेजर मशीन मंगाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने की तैयारी है, आधुनिक विधि से ऑपरेशन होने से मरीजों को भी परेशानियों से निजात मिलेगी।

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